इंदौर, 5 जून 2026: विश्व पर्यावरण दिवस 2026 के अवसर पर इंदौर जिले के सनावदिया गांव में जिम्मी मगिलिगन सेंटर फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट में 34वां वार्षिक पर्यावरण चर्चा सप्ताह (30 मई – 5 जून 2026) का भव्य समापन समारोह आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में युवाओं, शिक्षकों, पर्यावरण विशेषज्ञों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भाग लिया और पर्यावरण संरक्षण तथा जलवायु कार्रवाई के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।
कार्यक्रम की शुरुआत और सांस्कृतिक प्रस्तुति
कार्यक्रम की शुरुआत जीवांश बत्रा द्वारा शंखनाद एवं प्रार्थना से हुई। इसके बाद नित्या बत्रा ने एक भावपूर्ण कथक नृत्य प्रस्तुत किया, जिसने सभी दर्शकों का मन मोह लिया। इस प्रस्तुति में प्रकृति और मानव के बीच के गहरे संबंध को प्रभावशाली ढंग से दर्शाया गया।
पर्यावरण संवाद और रिपोर्ट प्रस्तुति
कार्यक्रम की प्रणेता डॉ. जनक पलटा मगिलिगन ने सभी प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए पूरे सप्ताह के पर्यावरणीय संवाद की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) और जलवायु कार्रवाई की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।
उन्होंने अपने चार दशकों के अनुभव साझा करते हुए कहा कि “सस्टेनेबल जीवनशैली की शुरुआत स्वयं से होती है” और छोटे-छोटे कदम बड़े बदलाव का आधार बन सकते हैं।
सप्ताहभर के प्रमुख कार्यक्रम
30 मई से 5 जून तक विभिन्न स्थानों पर जलवायु कार्रवाई और सतत विकास पर चर्चा हुई—
- 30 मई: ग्रह और पृथ्वी संरक्षण हेतु क्लाइमेट एक्शन
- 31 मई: स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण
- 1 जून: टिकाऊ आजीविका (रहेजा सोलर फूड परिसर)
- 2 जून: नर्सिंग में क्लाइमेट एक्शन की भूमिका
- 3 जून: सामुदायिक विकास हेतु जलवायु कार्रवाई (इन्फोसिस इंदौर)
- 4 जून: स्वच्छ वायु एवं जल संरक्षण
- 5 जून: विश्व पर्यावरण दिवस समारोह एवं समापन
युवाओं का संकल्प और भागीदारी
कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता संरक्षण, जल एवं ऊर्जा संरक्षण तथा पर्यावरण-अनुकूल जीवनशैली अपनाने का संकल्प लिया। विशेषज्ञों ने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि वास्तविक परिवर्तन की शुरुआत व्यक्तिगत स्तर से होती है।
विशेषज्ञों के प्रेरणादायक विचार
मुख्य अतिथि डॉ. योगेश गोस्वामी (कुलपति, श्री वैष्णव विद्यापीठ विश्वविद्यालय, इंदौर) ने कहा कि शैक्षणिक संस्थान केवल शिक्षा का माध्यम नहीं, बल्कि पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार नागरिक तैयार करने के केंद्र भी हैं।
विशेष अतिथि डॉ. रंजना गोस्वामी ने वैज्ञानिक सोच, जागरूकता और सतत जीवनशैली को पर्यावरण संरक्षण के लिए आवश्यक बताया।
सस्टेनेबल जीवनशैली पर जोर
कार्यक्रम में प्रतिभागियों को निम्नलिखित पर्यावरण-अनुकूल आदतें अपनाने के लिए प्रेरित किया गया—
- प्लास्टिक का कम उपयोग
- वृक्षारोपण और टेरेस गार्डन
- जल एवं ऊर्जा की बचत
- जूट बैग और पर्यावरण-अनुकूल उत्पादों का उपयोग
- कचरा कम करना और पुन: उपयोग को बढ़ावा देना
समापन और आभार
कार्यक्रम का समापन श्री वीरेंद्र गोयल द्वारा आभार प्रदर्शन के साथ हुआ। उन्होंने सभी अतिथियों, शिक्षकों, विद्यार्थियों और स्वयंसेवकों का धन्यवाद करते हुए पर्यावरण संरक्षण को जन-आंदोलन बनाने का आह्वान किया।
निष्कर्ष
यह आयोजन केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि एक सशक्त संदेश था कि “जलवायु कार्रवाई की शुरुआत स्वयं से होती है”। इस कार्यक्रम ने युवाओं को जागरूकता से आगे बढ़कर वास्तविक कार्रवाई करने और एक हरित, सुरक्षित एवं टिकाऊ भविष्य के निर्माण के लिए प्रेरित किया।