आरबीआई ने ब्याज दरों को स्थिर रखा, विदेशी पूंजी को आकर्षित करने के लिए नई रणनीतियाँ पेश कीं
आरबीआई का निर्णय
भारतीय रिजर्व बैंक ने ब्याज दरों को वर्तमान स्तर पर बनाए रखने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही, आरबीआई की नई नीति से दोहरी रणनीति का संकेत मिलता है। पहली रणनीति में विदेशी पूंजी को आकर्षित करना और दूसरी में महंगाई के बढ़ने पर लचीलापन बनाए रखना शामिल है। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता में हुई मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक में सर्वसम्मति से रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर बनाए रखने का निर्णय लिया गया। यह निर्णय वैश्विक अर्थव्यवस्था में बढ़ती अनिश्चितता और ऊर्जा की ऊंची कीमतों के प्रभाव को दर्शाता है।
विदेशी फंड का संभावित आगमन
ICICI बैंक ग्लोबल मार्केट्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, इन उपायों से लगभग 50 अरब डॉलर का विदेशी पूंजी प्रवाह हो सकता है। विश्लेषकों का मानना है कि इससे लिक्विडिटी में सुधार होगा और रुपया मजबूत होगा। इसके अलावा, RBI ने 'फुल्ली एक्सेसिबल रूट' (FAR) का विस्तार करने का निर्णय लिया है, जिससे विदेशी निवेशकों को भारतीय सरकारी प्रतिभूतियों तक अधिक पहुंच प्राप्त होगी।
महंगाई की संभावनाएँ
हालांकि रुपया हाल के निचले स्तरों से सुधरा है, महंगाई एक महत्वपूर्ण चिंता बनी हुई है। RBI ने FY27 के लिए महंगाई के अनुमान को बढ़ाकर 5.1 प्रतिशत कर दिया है। उम्मीद है कि महंगाई धीरे-धीरे बढ़ेगी और तीसरी तिमाही में 5.9 प्रतिशत तक पहुंच जाएगी।
महंगाई में संभावित वृद्धि
ICICI बैंक ग्लोबल मार्केट्स का मानना है कि ब्याज दरों में स्थिरता हमेशा के लिए नहीं रहेगी। यदि महंगाई RBI के 4 प्रतिशत के लक्ष्य से दूर रही, तो आने वाले समय में 50 से 75 बेसिस पॉइंट तक की वृद्धि हो सकती है।
बैंकों की प्रतिक्रिया
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के चेयरमैन CS सेट्टी ने कहा कि विदेशी पूंजी को आकर्षित करने के उपाय समय पर और प्रभावी हैं। इंडियन ओवरसीज बैंक के CEO अजय कुमार श्रीवास्तव ने भी इस निर्णय का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि स्थिर ब्याज दरें आर्थिक रिकवरी को बढ़ावा देंगी।
