आरबीआई की नई नीतियों से विदेशी निवेश में बढ़ोतरी की उम्मीद

भारतीय रिजर्व बैंक ने हाल ही में अपनी मौद्रिक नीति में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं, जिनका उद्देश्य विदेशी निवेश को बढ़ावा देना है। इनमें कैपिटल गेन टैक्स को समाप्त करना, सरकारी प्रतिभूतियों में विदेशी निवेशकों की पहुंच बढ़ाना और NRI तथा OCI के लिए इक्विटी निवेश की सीमाओं में वृद्धि शामिल है। ये कदम भारतीय अर्थव्यवस्था में विदेशी पूंजी के प्रवाह को बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। जानें इन नीतियों के बारे में विस्तार से।
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आरबीआई की मौद्रिक नीति में बदलाव

भारतीय रिजर्व बैंक ने शुक्रवार को रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रखा और अपनी मौद्रिक नीति को न्यूट्रल बनाए रखा है। इस बार आरबीआई का मुख्य ध्यान भारत में विदेशी निवेश को बढ़ावा देना है। इसके लिए, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) के लिए पूंजीगत लाभ कर को समाप्त कर दिया गया है। इसके अलावा, केंद्रीय बैंक ने अपनी नीति बैठक में सात महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। इनमें सरकारी प्रतिभूतियों में विदेशी निवेशकों की पहुंच, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों के लिए निवेश की सीमा, प्रवासी भारतीयों के लिए इक्विटी निवेश के नियम, सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों द्वारा बाहरी वाणिज्यिक उधारी, FCNR(B) जमा और निर्यात से होने वाली आय के नियम शामिल हैं। आइए, इन निर्णयों के बारे में विस्तार से जानते हैं।


1. कैपिटल गेन टैक्स समाप्त

भारत ने विदेशी पूंजी को आकर्षित करने और रुपये को स्थिर रखने के लिए, 1 अप्रैल 2026 से सरकारी प्रतिभूतियों में FII निवेश पर दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ कर समाप्त कर दिया है। वर्तमान में, विदेशी निवेशकों को 12 महीने से अधिक समय तक रखे गए सूचीबद्ध शेयरों और बांडों पर 12.5 प्रतिशत दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ कर चुकाना पड़ता है।


2. लॉन्ग-टर्म G-Secs के लिए FAR का विस्तार

आरबीआई ने सभी नए 15, 30 और 40 साल के सरकारी प्रतिभूति इश्यू को शामिल करने के लिए पूरी तरह से सुलभ मार्ग (FAR) का दायरा बढ़ाया है। इसका अर्थ है कि विदेशी निवेशकों को लंबे समय के भारतीय सरकारी बांडों तक अधिक पहुंच मिलेगी। इस कदम का उद्देश्य भारत के सॉवरेन डेट मार्केट में विदेशी भागीदारी को बढ़ाना और दीर्घकालिक प्रतिभूतियों के लिए निवेशक आधार को मजबूत करना है।


3. जनरल रूट के तहत FPI कंसंट्रेशन लिमिट हटाई गई

केंद्रीय बैंक ने जनरल रूट के तहत विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) के लिए निवेश पर लगी कंसंट्रेशन लिमिट को समाप्त कर दिया है। इससे FPIs को भारतीय डेट मार्केट में निवेश करने में अधिक स्वतंत्रता मिलेगी। इस बदलाव से विदेशी निवेशकों के लिए ऑपरेशनल चुनौतियाँ कम होने और भारतीय फिक्स्ड-इनकम एसेट्स तक पहुंच आसान होने की उम्मीद है।


4. NRIs और OCIs के लिए इक्विटी निवेश की सीमा बढ़ाई गई

आरबीआई ने SEBI रजिस्ट्रेशन के बिना सूचीबद्ध इक्विटीज में नॉन-रेसिडेंट इंडियंस (NRI) और ओवरसीज सिटिजन्स ऑफ इंडिया (OCI) के लिए अधिक निवेश सीमा की घोषणा की है। यह कदम पारंपरिक FPI चैनल से आगे निवेशकों के दायरे को बढ़ाता है और विदेश में रहने वाले भारतीयों को भारतीय शेयरों में निवेश के अधिक अवसर प्रदान करता है।


5. PSU ECBs के लिए फॉरेक्स स्वैप विंडो का विस्तार

पब्लिक सेक्टर कंपनियों द्वारा लिए गए एक्सटर्नल कमर्शियल बॉरोइंग (ECB) के लिए रियायती फॉरेक्स स्वैप विंडो को 30 सितंबर 2026 तक बढ़ा दिया गया है। इस सुविधा का उद्देश्य PSUs को विदेशी मुद्रा में लिए गए कर्ज को बेहतर तरीके से प्रबंधित करने में सहायता करना है।


6. FCNR(B) डिपॉजिट के लिए हेजिंग कॉस्ट सपोर्ट बढ़ाया गया

आरबीआई ने बैंकों को 3 से 5 साल की अवधि वाले FCNR(B) डिपॉजिट जुटाने के लिए पूरी हेजिंग कॉस्ट सपोर्ट 30 सितंबर 2026 तक बढ़ा दी है। इससे बैंकों के लिए ऐसे डिपॉजिट जुटाना आसान होगा, जिससे बैंकिंग प्रणाली में विदेशी मुद्रा का प्रवाह बढ़ सकता है।


7. एक्सपोर्ट कमाई वापस लाने की अवधि घटाई गई

आरबीआई ने निर्यात से होने वाली कमाई को भारत वापस लाने की समय-सीमा को 15 महीने से घटाकर 9 महीने कर दिया है। इसका अर्थ है कि निर्यातकों को अब नौ महीने के भीतर अपनी निर्यात कमाई देश में लानी होगी।