आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के बयान पर साधु संतों की प्रतिक्रियाएं
साधु संतों का स्वागत
अयोध्या (उप्र), 7 अगस्त: अयोध्या में कई साधु संतों ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की टिप्पणियों का स्वागत किया, जिसमें उन्होंने जेन-जी और युवाओं से संवाद स्थापित करने की बात की थी। भागवत ने बृहस्पतिवार को जेन-जी का समर्थन करते हुए कहा कि उनकी चिंताएं उचित हैं और उन्होंने उनकी ईमानदारी पर भरोसा जताया। उन्होंने यह भी कहा कि युवा जब विरोध-प्रदर्शन करते हैं, तो वे 'राष्ट्र विरोधी' नहीं होते, बल्कि यह लोकतंत्र में संवाद का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
महंत शशिकांत दास की प्रतिक्रिया
सरयू नित्य आरती के अध्यक्ष महंत शशिकांत दास ने भागवत के बयान को आंशिक रूप से सही मानते हुए कहा कि आंदोलन तब उठता है जब लोगों की समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया जाता। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि विरोध शांतिपूर्ण होना चाहिए और राष्ट्रविरोधी गतिविधियों का विरोध किया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कभी-कभी असामाजिक तत्व प्रदर्शन में शामिल हो जाते हैं और उन्हें राजनीतिक संरक्षण मिलता है।
कल्की राम का आरोप
रामदास ट्रस्ट के अध्यक्ष कल्की राम ने कहा कि ऐसे दृश्य अंतरराष्ट्रीय षड़यंत्रों के कारण उत्पन्न होते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि विद्यार्थियों के नाम पर उपद्रवी तत्वों ने विरोध में भाग लिया और केंद्र से ऐसे तत्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।
डॉक्टर देवेशाचार्य का समर्थन
हनुमानगढ़ी के मुख्य पुजारी डॉक्टर देवेशाचार्य ने भागवत के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि युवा देश का भविष्य हैं। उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि युवाओं से संवाद नहीं हो रहा। सरकार को शिक्षा और रोजगार से जुड़े मुद्दों पर उनसे सीधे बातचीत करनी चाहिए।
छात्रों का समर्थन
फतेहपुर में एक स्कूल में पेयजल, पंखे और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए विरोध प्रदर्शन में शामिल कक्षा 12 के छात्र अंकुर सोनकर ने भी भागवत के बयान का समर्थन किया। उन्होंने कहा, "मैं मोहन भागवत जी से सहमत हूं, लेकिन सरकार को भी इस पर ध्यान देना चाहिए।"
भाजपा की प्रतिक्रिया
प्रदेश भाजपा के महासचिव अभिजात मिश्रा ने कहा कि आरएसएस ने हमेशा राष्ट्र प्रथम के सिद्धांत का पालन किया है और जेन-जी को भागवत की सलाह से लाभ होगा।
विपक्ष की प्रतिक्रिया
हालांकि, विपक्षी दलों ने भागवत के बयान पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दीं। प्रदेश कांग्रेस प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने कहा कि आरएसएस को यह समझ में आ गया है कि जेन-जी को पीछे धकेला नहीं जा सकता। उन्होंने आरएसएस पर विश्वविद्यालयों में अपनी विचारधारा थोपने का आरोप लगाया।
भागवत का बयान
यह उल्लेखनीय है कि भागवत ने मुंबई में एक कार्यक्रम के दौरान लगभग 2,000 जेन-जी (जो आमतौर पर 1997-2012 के बीच जन्मे हैं) और 'जेन अल्फा' (2013-2025) से बातचीत के दौरान यह टिप्पणी की थी।
