आम आदमी पार्टी में बड़ा संकट: राघव चड्ढा और 7 सांसदों का भाजपा में शामिल होना

आम आदमी पार्टी (AAP) में शुक्रवार को एक बड़ा राजनीतिक संकट उत्पन्न हुआ, जब राघव चड्ढा और 7 अन्य सांसदों ने पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल होने का निर्णय लिया। यह घटना AAP के भीतर लंबे समय से चल रही सत्ता संघर्ष और अविश्वास का परिणाम है। स्वाति मालीवाल के आरोपों और पार्टी के भीतर की दरारों ने इस संकट को और बढ़ा दिया है। जानें इस घटनाक्रम के पीछे की जड़ें और इसके राजनीतिक प्रभाव।
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आम आदमी पार्टी में बड़ा संकट: राघव चड्ढा और 7 सांसदों का भाजपा में शामिल होना gyanhigyan

आम आदमी पार्टी का राजनीतिक संकट

शुक्रवार का दिन आम आदमी पार्टी (AAP) के लिए एक महत्वपूर्ण राजनीतिक संकट के रूप में सामने आया। राघव चड्ढा, जो कभी अरविंद केजरीवाल के करीबी सहयोगी माने जाते थे, ने 7 अन्य राज्यसभा सांसदों के साथ पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल होने का निर्णय लिया। यह घटना केवल एक दलबदल नहीं है, बल्कि AAP के भीतर लंबे समय से चल रही सत्ता संघर्ष, अविश्वास और कानूनी दबाव का परिणाम है।


इस कदम ने पार्टी के अंदर की गहरी दरारों को उजागर किया और तनाव में एक महत्वपूर्ण मोड़ ला दिया। यह घटना, जो अचानक और चौंकाने वाली राजनीतिक हार की तरह प्रतीत होती है, वास्तव में लंबे समय से चल रही सत्ता की खींचतान और अरविंद केजरीवाल तथा उनके नेताओं के बीच बढ़ते अविश्वास का नतीजा है।


संकट की जड़ें

इस संकट की जड़ें 2024 में देखी जा सकती हैं, जब स्वाति मालीवाल ने आरोप लगाया था कि 13 मई को केजरीवाल के आवास पर उनके एक करीबी सहयोगी ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया। इस घटना ने AAP के भीतर की दरारों को और चौड़ा कर दिया।


इस महीने की शुरुआत में, पार्टी ने राघव चड्ढा को राज्यसभा में उप-नेता के पद से हटा दिया, जिससे पार्टी के भीतर की खाई और गहरी हो गई।


राघव चड्ढा का पार्टी छोड़ना

राघव चड्ढा ने शुक्रवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में 7 सांसदों के पार्टी छोड़ने की पुष्टि की। उनका इस्तीफा तब आया जब ED ने अशोक मित्तल के आवास पर छापेमारी की, जो एक विवादास्पद मामले से संबंधित था।


AAP नेता संजय सिंह ने आरोप लगाया कि यह सामूहिक पलायन भाजपा के 'ऑपरेशन लोटस' का हिस्सा है, और सांसदों ने केंद्रीय एजेंसियों के दबाव में आकर इस्तीफा दिया।


चड्ढा का राजनीतिक सफर

राघव चड्ढा ने पार्टी में तेजी से प्रगति की और 2022 में पंजाब से राज्यसभा के लिए चुने गए। हालांकि, 2024 में केजरीवाल की गिरफ़्तारी के बाद उनकी स्थिति में गिरावट आई।


पार्टी के भीतर उनकी गैर-मौजूदगी और चुप्पी ने उनके खिलाफ सवाल उठाए, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें महत्वपूर्ण भूमिकाओं से हटा दिया गया।


स्वाति मालीवाल के बयान

स्वाति मालीवाल ने अपने इस्तीफे के पीछे भ्रष्टाचार, महिलाओं के उत्पीड़न और केजरीवाल के नेतृत्व में गुंडागर्दी को बढ़ावा देने जैसी चिंताओं का उल्लेख किया।


मालीवाल के अलावा, इस्तीफा देने वाले सभी सांसद पंजाब से चुने गए थे।