आप नेता ने ताहिर हुसैन पर भाजपा के लिए काम करने का आरोप लगाया

दिल्ली में आम आदमी पार्टी के अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने ताहिर हुसैन पर भाजपा के लिए काम करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि हुसैन के भाजपा से राजनीतिक संबंध थे और दंगों के दौरान आप ने उसे पार्टी से निष्कासित कर दिया था। भाजपा ने इस मामले में आप पर आरोप लगाए हैं। जानें इस विवाद की पूरी कहानी और इसके पीछे की राजनीति।
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ताहिर हुसैन पर गंभीर आरोप

दिल्ली में आम आदमी पार्टी (आप) के अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने शुक्रवार को यह दावा किया कि खुफिया ब्यूरो (आईबी) के अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा पाने वाले पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के लिए परोक्ष रूप से काम किया।


फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए सांप्रदायिक दंगों के लिए आम आदमी पार्टी को जिम्मेदार ठहराने के भाजपा के आरोपों को खारिज करते हुए भारद्वाज ने कहा कि दंगों से पहले हुसैन के भाजपा से राजनीतिक संबंध थे। उन्होंने यह भी बताया कि अंकित शर्मा की हत्या के मामले में हुसैन के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज होते ही आप ने उसे तुरंत पार्टी से निष्कासित कर दिया।


भारद्वाज ने यह आरोप लगाया कि जहां आम आदमी पार्टी ने हुसैन के खिलाफ कार्रवाई की, वहीं भाजपा ने दंगों से जुड़े मामलों में गंभीर आरोपों का सामना कर रहे अपने नेताओं का समर्थन जारी रखा।


भाजपा का आरोप और आप का जवाब

भारद्वाज ने कहा कि भाजपा अब इस मामले की जिम्मेदारी आम आदमी पार्टी पर डालने की कोशिश कर रही है। इससे पहले, हुसैन को दोषी ठहराए जाने के बाद भाजपा की दिल्ली इकाई के अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा ने आरोप लगाया था कि दंगों के दौरान आप के प्रमुख नेताओं ने हुसैन को 'संरक्षण' दिया।


मल्होत्रा ने कहा कि दिल्ली की अदालत द्वारा हुसैन को दोषी ठहराना इस बात का प्रमाण है कि आप के नेताओं ने दंगों को भड़काने में भूमिका निभाई।


भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा, 'आज अदालत ने दंगे भड़काने और अंकित शर्मा की हत्या के मामले में ताहिर हुसैन को उम्रकैद की सजा सुनाई है। इससे आम आदमी पार्टी का असली चेहरा सामने आ गया है।'


इसके जवाब में, भारद्वाज ने कहा कि हुसैन के भाजपा से राजनीतिक संबंध थे और भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने उसे पार्षद का टिकट दिलाने में मदद की थी, जिससे उसकी स्थानीय राजनीति में एंट्री हुई।


हुसैन का चुनावी सफर

भारद्वाज ने यह भी आरोप लगाया कि 2020 के दंगों के दौरान जिस स्थान से पत्थर और हथियार बरामद किए गए थे, वह पहले कपिल मिश्रा का कार्यालय था। उन्होंने कहा कि हुसैन ने भाजपा को चुनावी लाभ पहुंचाने के लिए ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के टिकट पर मुस्तफाबाद विधानसभा चुनाव लड़ा।


उन्होंने यह भी कहा कि हुसैन ने बिना आवश्यक अनुमति के अपने निर्वाचन क्षेत्र में प्रचार किया और सभाओं को संबोधित किया।