आनंद मालवीय का विवाद: सरकारी आदेश में 'घंटा' शब्द के कारण एसडीएम की कुर्सी गई
आनंद मालवीय का विवादास्पद मामला
मध्य प्रदेश के प्रशासनिक क्षेत्र में देवास के एसडीएम आनंद मालवीय का नाम इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। एक सरकारी आदेश में 'घंटा' शब्द के उपयोग ने उन्हें विवाद में डाल दिया है, जिससे उनकी कुर्सी चली गई।
आदेश के वायरल होते ही राजनीतिक हलचल मच गई, और मामला मंत्री स्तर तक पहुंच गया। इसके परिणामस्वरूप, संभाग आयुक्त ने तुरंत आनंद मालवीय को निलंबित कर दिया। आइए जानते हैं आनंद मालवीय के बारे में, जिनका प्रशासनिक सफर अब एक विवाद के कारण सवालों के घेरे में आ गया है।
आनंद मालवीय की पृष्ठभूमि
कौन हैं आनंद मालवीय?
आनंद मालवीय का जन्म इंदौर में हुआ, जहां उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की। उनके पिता एक निजी कंपनी में कार्यरत थे, और परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं थी। फिर भी, आनंद ने कभी भी कठिनाइयों को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया और सरकारी सेवा में स्थान बनाने का संकल्प लिया।
प्रशासनिक करियर का सफर
तहसीलदार से एसडीएम तक का सफर
आनंद ने लंबे संघर्ष के बाद नायब तहसीलदार के रूप में करियर की शुरुआत की। उनकी पहली पोस्टिंग 2007 में खरगोन जिले में हुई। ग्रामीण क्षेत्रों में काम करते हुए उन्होंने प्रशासन की वास्तविकता को समझा। 2014 में तहसीलदार बनने के बाद, उन्हें 2023 में देवास जिले का एसडीएम नियुक्त किया गया, जो उनके करियर का एक महत्वपूर्ण मोड़ था।
घंटा विवाद का उद्भव
कैलाश विजयवर्गीय ने जताई आपत्ति
हाल ही में जारी एक आदेश ने स्थिति को बदल दिया। आदेश में 'घंटा' शब्द का उपयोग सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिससे प्रदेश की राजनीति में हलचल मच गई। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने इसे अमानवीय और असंवेदनशील बताया, और कहा कि प्रशासनिक भाषा को सम्मानजनक होना चाहिए।
कहां से शुरू हुआ घंटा विवाद?
दरअसल, इंदौर में गंदे पानी के कारण कई लोगों की मौत हो गई थी। जब इस पर मंत्री विजयवर्गीय से सवाल पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि 'घंटा हो गया है तुमको।' इस बयान की आलोचना हुई, और जब एसडीएम ने इसी शब्द का उपयोग किया, तो उन्हें निलंबित कर दिया गया।
