आईआईटी-ISM ने अपशिष्ट जल से तांबा पुनर्प्राप्ति के लिए पेटेंट प्राप्त किया

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी)-ISM, धनबाद के शोधकर्ताओं ने अपशिष्ट जल से तांबा पुनर्प्राप्ति के लिए एक विद्युत-रासायनिक रिएक्टर विकसित किया है, जिसके लिए उन्हें भारतीय पेटेंट मिला है। यह तकनीक खनन और धातुकर्म उद्योगों में औद्योगिक अपशिष्ट जल के सतत उपचार में सहायक होगी। प्रोफेसर विपिन कुमार और उनके शोधार्थियों ने इस पेटेंट को प्राप्त करने के लिए कई परीक्षणों का सामना किया। यह नवाचार पर्यावरणीय चुनौतियों का समाधान खोजने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
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आईआईटी-ISM का नया पेटेंट

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी)-भारतीय खनि विद्यापीठ (आईएसएम), धनबाद के शोधकर्ताओं ने अपशिष्ट जल से तांबा निकालने के लिए एक विद्युत-रासायनिक रिएक्टर विकसित किया है, जिसके लिए उन्हें भारतीय पेटेंट मिला है। संस्थान ने शुक्रवार को इस उपलब्धि की जानकारी दी। यह तकनीक विशेष रूप से खनन और धातुकर्म उद्योगों में औद्योगिक अपशिष्ट जल के सतत उपचार और संसाधनों की पुनर्प्राप्ति में सहायक सिद्ध होगी।


संस्थान ने बताया कि ‘एन इलेक्ट्रोकेमिकल रिएक्टर फॉर कैथोडिक रिकवरी ऑफ कॉपर फ्रॉम वेस्टवाटर’ शीर्षक वाला यह पेटेंट भारत सरकार के पेटेंट कार्यालय द्वारा प्रोफेसर विपिन कुमार और उनके पीएचडी शोधार्थियों निशांत पांडेय और अंकुर सिंह को प्रदान किया गया है। यह तकनीक अपशिष्ट जल के उपचार के साथ-साथ तांबे की पुनर्प्राप्ति की प्रक्रिया को सक्षम बनाती है, जो खनन और धातुकर्म क्षेत्रों के लिए पर्यावरण के अनुकूल समाधान प्रस्तुत करती है। प्रोफेसर विपिन कुमार ने कहा, ‘‘यह पेटेंट कई वर्षों के अनुसंधान का परिणाम है।


इस पेटेंट को प्राप्त करने के लिए हमें एक कठोर परीक्षण प्रक्रिया से गुजरना पड़ा, जिसमें इस तकनीक की नवीनता और वैज्ञानिक उपयोगिता को प्रमाणित करना शामिल था। हमें उम्मीद है कि यह नवाचार विशेष रूप से खनन प्रभावित क्षेत्रों में अपशिष्ट जल के सतत प्रबंधन और संसाधनों की पुनर्प्राप्ति में सहायक होगा।’’


आईआईटी-आईएसएम के निदेशक प्रोफेसर सुकुमार मिश्रा ने कहा कि यह पेटेंट समाजोपयोगी प्रौद्योगिकियों के विकास पर संस्थान के विशेष ध्यान को दर्शाता है। उन्होंने कहा, ‘‘यह उपलब्धि पर्यावरणीय चुनौतियों का नवोन्मेषी और टिकाऊ समाधानों के माध्यम से समाधान खोजने के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।


औद्योगिक विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करने के लिए ऐसी प्रौद्योगिकियां अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।’’


संस्थान ने बताया कि प्रोफेसर विपिन कुमार का शोध कार्य पर्यावरणीय सूक्ष्मजीव विज्ञान, सूक्ष्मजीव आधारित विद्युत-रासायनिक प्रणालियों, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और जैविक अपशिष्ट जल उपचार पर केंद्रित है। प्रोफेसर कुमार ने 100 से अधिक शोध पत्र प्रकाशित किए हैं और उन्हें इंदर मोहन थापर फाउंडेशन रिसर्च अवॉर्ड सहित कई सम्मान प्राप्त हो चुके हैं। वह राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी के सदस्य भी हैं।