आंध्र प्रदेश में मुर्गा लड़ाई में जीती गई 1.53 करोड़ की राशि

आंध्र प्रदेश के पश्चिम गोदावरी जिले में मकर संक्रांति के अवसर पर एक मुर्गा लड़ाई में एक व्यक्ति ने 1.53 करोड़ रुपए की राशि जीती। इस आयोजन में मुर्गों के पैरों में चाकू बांधकर लड़ाई कराई गई, जो विवादास्पद है। रमेश नामक व्यक्ति ने अपने विशेष नस्ल के मुर्गे को छह महीने तक तैयार किया था। इस घटना ने स्थानीय मीडिया में काफी चर्चा बटोरी है, जबकि अधिकारियों ने इस पर प्रतिबंध लगाने की कोशिश की है। जानें इस अनोखे और विवादास्पद आयोजन के बारे में अधिक जानकारी।
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आंध्र प्रदेश में मुर्गा लड़ाई में जीती गई 1.53 करोड़ की राशि

आंध्र प्रदेश में मुर्गा लड़ाई का आयोजन

आंध्र प्रदेश में मुर्गा लड़ाई में जीती गई 1.53 करोड़ की राशि

आंध्र प्रदेश के पश्चिम गोदावरी जिले में 15 जनवरी 2026 को मकर संक्रांति के अवसर पर एक मुर्गा लड़ाई में एक व्यक्ति ने 1.53 करोड़ रुपए की बड़ी राशि जीतने का दावा किया है। राजमुंद्री रमेश नामक इस व्यक्ति ने ताडेपल्लीगुडेम कस्बे में यह राशि जीती। रमेश और गुडीवाडा प्रभाकर ने अपने मुर्गों पर दांव लगाया था, जिनके पैरों में चाकू बंधे हुए थे। रमेश ने यह दांव जीतकर अपने मुर्गे की जीत का जश्न मनाया।

मुर्गा बना करोड़पति
इस दांव को इस संक्रांति सीजन का सबसे बड़ा दांव माना जा रहा है। स्थानीय चैनलों पर प्रसारित वीडियो में रमेश और उसके दोस्तों को भारी जीत पर जश्न मनाते हुए देखा जा सकता है। रमेश ने बताया कि उसने अपने विशेष नस्ल के मुर्गे को छह महीने तक सूखे मेवे खिलाए ताकि वह लड़ाई के लिए तैयार और मजबूत हो सके।

मुर्गा लड़ाई का आयोजन जारी
गुरुवार को आंध्र प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर मुर्गा लड़ाई का आयोजन बड़े पैमाने पर किया गया। अदालत के प्रतिबंध और अधिकारियों की चेतावनियों का कोई असर नहीं पड़ा, क्योंकि इस दौरान करोड़ों का लेन-देन हुआ। कई लोग मुर्गा लड़ाई को संक्रांति उत्सव का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं। आयोजकों ने पूर्वी गोदावरी, पश्चिमी गोदावरी, डॉक्टर बीआर अंबेडकर कोनासीमा, एलुरु, पोलावरम और कृष्णा जिलों में विशेष अखाड़े स्थापित किए हैं।

तीसरे दिन भी जारी रहेगी लड़ाई
पुलिस और जिला अधिकारियों की चेतावनियों के बावजूद मुर्गा लड़ाई और जुआ गतिविधियों का आयोजन जारी है। जन प्रतिनिधियों ने आयोजनों में भाग लेकर आयोजकों का समर्थन किया है। आयोजकों ने 16 जनवरी 2026 को तीसरे दिन भी मुर्गा लड़ाई जारी रखने की योजना बनाई है। प्रशिक्षित मुर्गों के पैरों में चाकू बांधकर लड़ाई कराई जाती है, और दर्शक उत्साह से उनका समर्थन करते हैं। अक्सर इस लड़ाई में एक मुर्गे की जान चली जाती है। पशु क्रूरता निवारण अधिनियम और आंध्र प्रदेश जुआ अधिनियम के तहत मुर्गा लड़ाई और उससे संबंधित जुआ अवैध है।