आंध्र प्रदेश में पीएम-सेतु योजना के तहत आर्सेलर मित्तल का बड़ा निवेश

आंध्र प्रदेश में पीएम-सेतु योजना के तहत आर्सेलर मित्तल निप्पॉन स्टील इंडिया द्वारा 60,000 करोड़ रुपए का बड़ा निवेश किया जाएगा। यह योजना कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय द्वारा स्वीकृत की गई है, जिससे राज्य औद्योगिक साझेदारी में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। आंध्र प्रदेश इस योजना के तहत पहला राज्य बन गया है, जो उद्योग-संचालित मॉडल को लागू करेगा। आगे और भी निवेश योजनाओं की मंजूरी की उम्मीद है, जो भारत के विकास में सहायक होंगी।
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आर्सेलर मित्तल का निवेश

राष्ट्रीय संचालन समिति (एनएससी) ने आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) कॉम्प्लेक्स के लिए आर्सेलर मित्तल निप्पॉन स्टील इंडिया द्वारा प्रस्तुत रणनीतिक निवेश योजना को स्वीकृति दे दी है। सरकार ने शनिवार को यह जानकारी दी कि यह मंजूरी 60,000 करोड़ रुपए की 'पीएम-सेतु' योजना के अंतर्गत दी गई है.


पीएम-सेतु योजना का महत्व

यह पीएम-सेतु योजना के तहत स्वीकृत पहली रणनीतिक निवेश योजना है। इसके साथ, आंध्र प्रदेश इस योजना के तहत औद्योगिक साझेदारी को लागू करने वाला पहला राज्य बन गया है। यह स्वीकृति कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय द्वारा आयोजित राष्ट्रीय संचालन समिति की तीसरी बैठक में दी गई.


आंध्र प्रदेश की उपलब्धि

एक आधिकारिक बयान में बताया गया कि इस मंजूरी के साथ आंध्र प्रदेश पीएम-सेतु योजना के तहत एक प्रमुख औद्योगिक भागीदार को शामिल करने वाला पहला राज्य बन गया है। यह योजना में निर्धारित उद्योग-संचालित हब-एंड-स्पोक मॉडल को लागू करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। बयान में यह भी कहा गया कि आने वाले महीनों में और भी रणनीतिक निवेश योजनाओं को राष्ट्रीय संचालन समिति से मंजूरी मिलने की संभावना है, जिससे विकसित भारत 2047 के लिए व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण व्यवस्था में बदलाव का मार्ग प्रशस्त होगा.


राज्य संचालन समितियों का गठन

कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय के अनुसार, 32 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों ने अपनी राज्य संचालन समितियों का गठन कर लिया है। वहीं, 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों ने प्रमुख औद्योगिक भागीदारों के चयन के लिए उद्योगों से प्रस्ताव आमंत्रित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। मंत्रालय ने बताया कि कई प्रक्रियाएं अगले कुछ सप्ताह में पूरी होने की संभावना है। यह उद्योगों की रुचि और राज्यों की तैयारियों के बीच बढ़ते तालमेल को दर्शाता है.