आंध्र प्रदेश की राजधानी अमरावती का आधिकारिक ऐलान, 2024 से लागू
आंध्र प्रदेश की राजधानी अमरावती को आधिकारिक रूप से 2024 से मान्यता दी गई है। यह निर्णय आंध्र प्रदेश पुनर्गठन (संशोधन) अधिनियम के तहत लिया गया है, जिससे राज्य में शासन की निरंतरता सुनिश्चित होती है। मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने इस फैसले की पुष्टि की और इसे आंध्र प्रदेश की जनता की जीत बताया। हालांकि, विपक्ष ने इस निर्णय पर सवाल उठाए हैं। जानें इस महत्वपूर्ण घटनाक्रम के बारे में और अधिक जानकारी।
| Apr 7, 2026, 10:59 IST
आंध्र प्रदेश की नई राजधानी का ऐलान
लंबे समय के इंतज़ार के बाद, अमरावती को आंध्र प्रदेश की आधिकारिक राजधानी के रूप में मान्यता दी गई है। 6 अप्रैल को आंध्र प्रदेश पुनर्गठन (संशोधन) अधिनियम, 2026 के तहत राजपत्र अधिसूचना पर हस्ताक्षर किए गए, जिससे यह निर्णय कानूनी रूप से मान्यता प्राप्त कर गया। इस अधिसूचना के अनुसार, अमरावती को 2 जून, 2024 से आधिकारिक राजधानी के रूप में मान्यता दी जाएगी।
शासन में निरंतरता और अनिश्चितता का अंत
यह निर्णय शासन में स्थिरता लाता है और प्रशासनिक केंद्र के रूप में अमरावती के चयन को कानूनी रूप प्रदान करता है। इस घोषणा के साथ, तेलंगाना के गठन और हैदराबाद के साथ संयुक्त राजधानी व्यवस्था के कारण उत्पन्न 12 वर्षों की अनिश्चितता का अंत हो गया है।
मुख्यमंत्री नायडू का बयान
CM नायडू ने इस घटनाक्रम की पुष्टि की
मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने X पर इस महत्वपूर्ण घटनाक्रम की पुष्टि करते हुए कहा, "आंध्र प्रदेश की राजधानी अमरावती है।" यह घोषणा संसद में आंध्र प्रदेश पुनर्गठन (संशोधन) अधिनियम के पारित होने के बाद की गई है।
यह नया कानून 2014 के पुनर्गठन अधिनियम में संशोधन करता है, जिसमें स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि "अमरावती नई राजधानी होगी," और इस प्रकार हैदराबाद को अस्थायी संयुक्त राजधानी बनाने की पूर्व व्यवस्था को समाप्त कर दिया गया है।
विधानसभा और लोकसभा की मंजूरी
28 मार्च को राज्य विधानसभा द्वारा अमरावती के समर्थन में प्रस्ताव पारित होने के बाद इस निर्णय को और मजबूती मिली। इसके बाद, 1 अप्रैल को लोकसभा ने इस विधेयक को मंजूरी दी और 2 अप्रैल को राज्यसभा ने इसे पारित किया।
मुख्यमंत्री का आभार
CM ने आभार व्यक्त किया
नायडू ने इस निर्णय का समर्थन करने के लिए राष्ट्रीय नेतृत्व का धन्यवाद किया। उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा, "यह आंध्र प्रदेश की जनता, विशेषकर अमरावती के किसानों की जीत है।"
विपक्ष की प्रतिक्रिया
जहां कई लोगों ने इस कदम का स्वागत किया, वहीं विपक्षी दलों ने इस निर्णय पर सवाल उठाए। YSR कांग्रेस पार्टी के सांसद गोल्ला बाबू राव ने इस कानून की आलोचना करते हुए इसे "एक नाटक" बताया और कहा कि राजधानी में किसी भी बदलाव से समाज के सभी वर्गों के हितों का ध्यान रखा जाना चाहिए।
