आंध्र प्रदेश की जनसंख्या नीति पर कांग्रेस सांसद की चिंता

कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने आंध्र प्रदेश सरकार द्वारा प्रस्तावित जनसंख्या नीति पर चिंता जताई है, जिसमें तीसरे बच्चे के लिए 25,000 रुपये का प्रोत्साहन देने का सुझाव दिया गया है। उन्होंने इस नीति के पीछे की सोच पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकारों को एक सक्षम कार्यबल बनाने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, खासकर जब तकनीकी प्रगति पारंपरिक नौकरियों को प्रभावित कर रही है। टैगोर ने यह भी बताया कि भारत की असली चुनौती जनसंख्या का आकार नहीं, बल्कि युवाओं के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और रोजगार के अवसरों की कमी है।
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आंध्र प्रदेश की जनसंख्या नीति पर कांग्रेस सांसद की चिंता

कांग्रेस सांसद की आलोचना

कांग्रेस के सांसद मणिकम टैगोर ने शुक्रवार को आंध्र प्रदेश सरकार द्वारा पेश की गई नई जनसंख्या नीति पर अपनी चिंता व्यक्त की। इस नीति के तहत, तीसरे या उससे अधिक बच्चों वाले परिवारों को 25,000 रुपये का प्रोत्साहन देने का प्रस्ताव है। टैगोर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर इस नीति के औचित्य पर सवाल उठाते हुए कहा कि वर्तमान में सरकारों को एक सक्षम कार्यबल बनाने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, जो तेजी से बदलती वैश्विक अर्थव्यवस्था में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रोबोटिक्स और स्वचालन जैसी तकनीकों के अनुकूल हो सके।


उन्होंने कहा कि आंध्र प्रदेश सरकार का यह कदम बड़े परिवारों को प्रोत्साहित करने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करता है, लेकिन इससे नीति की दिशा को लेकर गंभीर चिंताएं उत्पन्न होती हैं। यह उस समय हो रहा है जब दुनिया भर के देश तकनीकी प्रगति के कारण पारंपरिक नौकरियों के लुप्त होने की तैयारी कर रहे हैं।


आर्थिक चुनौतियों पर ध्यान

टैगोर ने 'एक्स' पर लिखा कि एन चंद्रबाबू नायडू के नेतृत्व वाली आंध्र प्रदेश सरकार ने जनसंख्या नीति का मसौदा पेश किया है, जिसमें तीसरे बच्चे के लिए 25,000 रुपये और बड़े परिवारों के लिए अन्य प्रोत्साहन देने का प्रस्ताव है। उन्होंने कहा कि यह एक गंभीर सवाल उठाता है। जब कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रोबोटिक्स और स्वचालन तेजी से वैश्विक अर्थव्यवस्था को बदल रहे हैं, तब देश को ऐसे भविष्य की तैयारी करनी चाहिए जहां कई पारंपरिक नौकरियां समाप्त हो सकती हैं।


उन्होंने यह भी कहा कि भारत पहले से ही दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाला देश है और आने वाले दशकों में भी ऐसा ही रहेगा। असली चुनौती जनसंख्या का आकार नहीं, बल्कि हर साल कार्यबल में शामिल होने वाले लाखों युवाओं के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, कौशल, रोजगार और अवसरों की कमी है।


दूरदर्शिता की कमी

टैगोर ने आगे कहा कि बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और रोजगार सृजन पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय, मौद्रिक प्रोत्साहनों के माध्यम से जनसंख्या वृद्धि को प्रोत्साहित करना अल्पकालिक राजनीतिक सोच को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि भारत पहले से ही दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला देश है और अगले 50 वर्षों तक ऐसा ही बना रहेगा। हमारी समस्या जनसंख्या की कमी नहीं है, बल्कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, कौशल, रोजगार और अवसरों की कमी है।