असम विधानसभा चुनावों में झामुमो का स्वतंत्र चुनाव लड़ने का निर्णय

असम विधानसभा चुनावों की तैयारी में झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने 21 सीटों पर स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने का निर्णय लिया है। इस कदम ने कांग्रेस को चिंतित कर दिया है, क्योंकि उन्हें डर है कि इससे भाजपा विरोधी आदिवासी वोटों का विभाजन हो सकता है। कांग्रेस ने झामुमो के साथ गठबंधन की उम्मीद की थी, लेकिन अब स्थिति बदल गई है। जानें इस राजनीतिक घटनाक्रम के पीछे की पूरी कहानी।
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असम विधानसभा चुनावों में झामुमो का स्वतंत्र चुनाव लड़ने का निर्णय

असम चुनावों में विपक्षी गठबंधन को झटका

असम विधानसभा चुनावों की तैयारी के बीच विपक्षी गठबंधन को एक महत्वपूर्ण झटका लगा है। झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने आगामी चुनावों में 21 सीटों पर स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने का निर्णय लिया है। इस निर्णय ने कांग्रेस के लिए चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि उन्हें आशंका है कि इससे भाजपा विरोधी आदिवासी वोटों में विभाजन हो सकता है।


झामुमो ने 9 अप्रैल को होने वाले 126 सदस्यीय असम विधानसभा चुनावों के लिए 21 उम्मीदवारों की सूची जारी की। कांग्रेस नेता राकेश रंजन ने बताया कि पार्टी को उम्मीद थी कि झामुमो विपक्षी गठबंधन का हिस्सा बनेगा।


उन्होंने कहा, 'हम असम चुनाव एक साथ लड़ने की इच्छा रखते थे। असम कांग्रेस के अध्यक्ष गौरव गोगोई अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ झारखंड गए थे और हमें झामुमो के साथ गठबंधन की उम्मीद थी।' हालांकि, झामुमो ने अकेले 21 उम्मीदवार उतारने का निर्णय लिया, जिससे आदिवासी वोटों में बंटवारा हो सकता है। रंजन ने कहा कि दोनों दलों का लक्ष्य असम में भाजपा को हराना है।


झारखंड कांग्रेस के अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने कहा कि उनकी पार्टी ने झामुमो के साथ समझौता करने के लिए गंभीर प्रयास किए हैं। उन्होंने बताया कि कांग्रेस ने झामुमो को 5 से 7 सीटें देने का प्रस्ताव रखा है, साथ ही उन क्षेत्रों में संगठनात्मक समर्थन देने का भी आश्वासन दिया है जहां झामुमो के उम्मीदवार चुनाव लड़ेंगे। कमलेश ने कहा, 'हमारा उद्देश्य असम विधानसभा में झामुमो का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना था।'