असम विधानसभा चुनाव: सियासी दलों के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा
असम विधानसभा चुनाव में भाजपा और कांग्रेस के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिल रही है। भाजपा जीत की हैट्रिक लगाने का दावा कर रही है, जबकि कांग्रेस सत्ता में वापसी की उम्मीद कर रही है। महंगाई, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दे चुनाव परिणामों को प्रभावित कर सकते हैं। जानें इन मुद्दों पर राजनीतिक दलों की क्या रणनीतियां हैं और कैसे ये चुनावी माहौल को बदल सकते हैं।
| Apr 7, 2026, 15:56 IST
चुनावी माहौल
असम विधानसभा चुनाव के लिए सभी राजनीतिक दल जोर-शोर से रैलियां आयोजित कर रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) लगातार जीत की हैट्रिक लगाने का दावा कर रही है, जबकि कांग्रेस पार्टी सत्ता में वापसी की उम्मीद लगाए बैठी है। उल्लेखनीय है कि भाजपा ने 2016 में पहली बार राज्य में जीत हासिल की थी। इस बीच, विपक्षी दल सत्ताधारी पार्टी के खिलाफ मुद्दे उठाकर उसे घेरने का प्रयास कर रहे हैं, जो कि चुनावी माहौल को और भी तनावपूर्ण बना सकता है।
राज्य के प्रमुख मुद्दे
एंटी-इंकमबेंसी
भाजपा राज्य में विकास के मुद्दे को प्रमुखता से उठा रही है। हालांकि, कुछ महत्वपूर्ण मुद्दे ऐसे हैं जिन पर विपक्षी दलों की जोरदार अपील से चुनाव परिणाम 50-50 हो सकते हैं।
महंगाई
वास्तव में, वस्तुओं की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, जिसका सीधा असर आम लोगों की दैनिक जिंदगी पर पड़ रहा है। यह मुद्दा चुनाव परिणामों को प्रभावित कर सकता है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल महंगाई, भ्रष्टाचार और बेरोजगारी के खिलाफ असम में विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। राज्य में खाद्य महंगाई में तेजी से वृद्धि हुई है, जिससे ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के मतदाता प्रभावित हो रहे हैं।
अन्य राजनीतिक दल भी महंगाई, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं, जिसे सत्ता विरोधी लहर के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, सत्ताधारी दल ने इन आरोपों को खारिज करते हुए अपनी 'विकास परियोजनाओं' पर ध्यान केंद्रित किया है।
