असम में बाढ़ पीड़ितों के लिए कांग्रेस नेताओं की अपील

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी ने असम में बाढ़ से प्रभावित लोगों के प्रति एकजुटता व्यक्त की और स्थायी समाधान की मांग की। उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी ने बाढ़ की समस्या के समाधान का वादा किया था, लेकिन अब तक कुछ नहीं किया गया। खरगे ने राहत और पुनर्वास के लिए सभी संसाधनों के उपयोग की आवश्यकता पर जोर दिया। राहुल गांधी ने भी बाढ़ में जान गंवाने वालों के प्रति शोक व्यक्त किया और केंद्र व राज्य सरकारों से प्रभावी राहत कार्यों की अपील की।
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कांग्रेस नेताओं की एकजुटता

गुवाहाटी, 27 जुलाई: कांग्रेस के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोमवार को असम में बाढ़ से प्रभावित लोगों के प्रति अपनी एकजुटता व्यक्त की। उन्होंने इस गंभीर समस्या के स्थायी समाधान की आवश्यकता पर जोर दिया। इस वर्ष असम में बाढ़ के कारण 68 लोगों की जान गई है और व्यापक तबाही हुई है। दोनों नेताओं ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी ने इसी मुद्दे को लेकर सत्ता में आने का वादा किया था।


राहत और पुनर्वास की मांग

खरगे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि असम में बाढ़ से हुई तबाही से वह बेहद दुखी हैं, जिसमें 68 लोगों की जान गई है और लगभग 10 लाख लोग प्रभावित हुए हैं। उन्होंने मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की और कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों को राहत और पुनर्वास कार्यों के लिए सभी संसाधनों का उपयोग करना चाहिए। उन्होंने ‘पीएम-केयर्स फंड’ से प्रभावित परिवारों के लिए त्वरित सहायता की मांग की।


भाजपा के वादों पर सवाल

खरगे ने यह भी कहा कि भाजपा ने 2016 में असम के लिए अपने दृष्टिकोण पत्र में बाढ़ की समस्या का स्थायी समाधान करने का वादा किया था। उन्होंने सवाल उठाया कि भाजपा शासन के दस वर्ष पूरे हो चुके हैं, लेकिन उन वादों का क्या हुआ? उन्होंने असम की सरकार पर कटाव प्रबंधन और बाढ़ नियंत्रण में विफल रहने का आरोप लगाया।


राहुल गांधी की प्रतिक्रिया

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी बाढ़ में जान गंवाने वालों के प्रति शोक व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह एक गंभीर आपदा है और उन्होंने प्रभावित लोगों के प्रति अपनी एकजुटता दिखाई। सोशल मीडिया पर उन्होंने उम्मीद जताई कि केंद्र और राज्य सरकार राहत और बचाव कार्यों में कोई कमी नहीं छोड़ेगी। उन्होंने बाढ़ की समस्या के स्थायी समाधान की आवश्यकता पर जोर दिया, जिसमें वैज्ञानिक दृष्टिकोण और मजबूत बुनियादी ढांचे का विकास शामिल होना चाहिए।