असम में बाढ़: तबाही और राजनीतिक विवाद का सामना

असम में इस वर्ष मानसून ने भयंकर बाढ़ का रूप धारण कर लिया है, जिससे 100 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। 14 जिलों में 1.60 लाख से अधिक लोग प्रभावित हैं, और बाढ़ ने कृषि भूमि, सड़कें और पुलों को बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया है। राहत कार्य जारी हैं, लेकिन अवैध खनन को लेकर राजनीतिक विवाद भी बढ़ रहा है। जानें इस संकट की पूरी कहानी और राहत प्रयासों की स्थिति के बारे में।
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असम में बाढ़ का संकट

इस वर्ष असम में मानसून ने केवल बारिश नहीं, बल्कि व्यापक तबाही भी लाई है। बाढ़ की स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है। पिछले 24 घंटों में छह और लोगों की मौत के साथ, इस साल बाढ़ से मरने वालों की संख्या लगभग 100 तक पहुंच गई है। 14 जिलों में 1.60 लाख से अधिक लोग जलप्रलय की चपेट में हैं, और सैकड़ों गांव पानी में डूब चुके हैं। हजारों हेक्टेयर कृषि भूमि बर्बाद हो गई है, सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त हैं, और पशुधन बह गया है। शहरी क्षेत्रों में भी जलभराव ने जनजीवन को प्रभावित किया है। इस प्राकृतिक आपदा के बीच अवैध कोयला और पत्थर खनन को लेकर राजनीतिक विवाद भी बढ़ गया है।


मौतों की संख्या और प्रभावित क्षेत्र

असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ASDMA) के अनुसार, बुधवार को शिवसागर और बिश्वनाथ जिलों में दो-दो लोगों की तथा गोलाघाट और मोरीगांव में एक-एक व्यक्ति की मौत हुई। मोरीगांव के मायोंग क्षेत्र में शहरी बाढ़ के कारण एक व्यक्ति की जान गई, जबकि उदालगुड़ी जिले में एक व्यक्ति के लापता होने की सूचना है। मंगलवार तक मृतकों की संख्या 89 थी, लेकिन लगातार बारिश ने स्थिति को और गंभीर बना दिया।


बाढ़ से प्रभावित जिले

राज्य के शिवसागर, गोलाघाट, जोरहाट, लखीमपुर, चराइदेव, बिश्वनाथ, धेमाजी, कामरूप महानगर, कार्बी आंगलोंग, सोनितपुर, तिनसुकिया, नगांव, दरांग और उदालगुड़ी सहित 14 जिले बाढ़ से प्रभावित हैं। शिवसागर सबसे अधिक प्रभावित है, जहां 57 हजार से अधिक लोग संकट का सामना कर रहे हैं।


बाढ़ की गंभीरता

राज्य के 563 गांव जलमग्न हैं और लगभग 16,952 हेक्टेयर कृषि भूमि बाढ़ के पानी में डूब चुकी है। सात बड़े तटबंध टूट गए हैं, जिनमें बिश्वनाथ के ब्रह्माजन क्षेत्र में पांच और दरांग के मंगलदोई में दो तटबंध शामिल हैं। धानसिरी नदी न्यूमालीगढ़ में खतरे के निशान से ऊपर बह रही है, जिससे निचले इलाकों में नया खतरा उत्पन्न हो रहा है।


राहत कार्य और राजनीतिक विवाद

प्रशासन ने राहत और बचाव कार्यों को तेज करते हुए 105 राहत शिविर और वितरण केंद्र स्थापित किए हैं, जहां 44 हजार से अधिक लोग रह रहे हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने भी बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया। इस बीच, बाढ़ के कारणों को लेकर राजनीतिक विवाद भी बढ़ गया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि नागालैंड सीमा से लगे क्षेत्रों में अनियंत्रित खनन ने बाढ़ की स्थिति को और खराब किया है।


सामाजिक संगठनों की मदद

इस त्रासदी के बीच कई सामाजिक संगठन और फिल्मी हस्तियां भी राहत कार्यों में जुटी हैं। अभिनेता सलमान खान की संस्था ने प्रभावित गांवों में बाढ़रोधी मकान तैयार किए हैं। रणदीप हुड्डा ने भी लोगों से मदद की अपील की है।


भविष्य की चुनौतियाँ

मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों में और बारिश की संभावना जताई है, जिससे स्थिति और बिगड़ सकती है। असम को न केवल बाढ़ से निपटने की चुनौती का सामना करना है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और राजनीतिक जवाबदेही जैसे गंभीर मुद्दों का भी समाधान करना होगा।