असम में अवैध बांग्लादेशी घुसपैठ के खिलाफ सख्त कार्रवाई
असम में अवैध बांग्लादेशी घुसपैठ के खिलाफ मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा की सरकार ने सख्त कदम उठाए हैं। हाल ही में सुरक्षा बलों ने कई घुसपैठियों को पहचान कर उन्हें वापस भेजा। इस अभियान का उद्देश्य राज्य की सुरक्षा और पहचान को बनाए रखना है। पिछले दो वर्षों में 1,679 बांग्लादेशी नागरिकों को वापस भेजा गया है। इस प्रक्रिया पर सवाल उठाने वाले विधायकों को सरकार ने स्पष्ट किया कि कार्रवाई केवल कानूनी रूप से चिन्हित अवैध विदेशियों के खिलाफ की जा रही है। यह अभियान वैश्विक अवैध प्रवासन संकट का भी हिस्सा है, जो कई देशों में गंभीर चुनौतियाँ उत्पन्न कर रहा है।
| Aug 1, 2026, 15:11 IST
असम सरकार का कड़ा संदेश
असम में अवैध बांग्लादेशी घुसपैठ के खिलाफ मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा की सरकार ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि राज्य की सीमाओं, सुरक्षा और पहचान से खिलवाड़ करने वालों के लिए अब कोई स्थान नहीं है। 29 जुलाई की रात, सुरक्षा बलों ने 21 अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों को पहचान कर उन्हें सीमा पार वापस भेज दिया। इससे एक दिन पहले 18 अन्य घुसपैठियों के खिलाफ भी इसी तरह की कार्रवाई की गई थी। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा कि असम में अवैध रूप से बसने की हर कोशिश को विफल किया जाएगा और राज्य की सुरक्षा को कमजोर करने वाले किसी भी तत्व के खिलाफ कठोर कार्रवाई जारी रहेगी। उनका संदेश स्पष्ट है कि असम में अवैध घुसपैठ की संभावना अब समाप्त हो चुकी है और कानून तोड़ने वालों के लिए यहां कोई सुरक्षित स्थान नहीं है।
पिछले दो वर्षों में की गई कार्रवाई
असम सरकार के अनुसार, पिछले दो वर्षों में 1,679 बांग्लादेशी नागरिकों को वापस भेजा जा चुका है। मुख्यमंत्री ने विधानसभा में बताया कि 1 जुलाई 2024 से 30 जून 2026 के बीच यह कार्रवाई केंद्रीय गृह मंत्रालय के दिशा-निर्देशों और Immigrants (Expulsion from Assam) Act, 1950 के प्रावधानों के अनुसार की गई। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि जिन मामलों में उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई चल रही है, उनमें निर्वासन की कार्रवाई नहीं की जाती। जिन लोगों को वापस भेजा गया है, वे या तो विदेशी न्यायाधिकरण द्वारा घोषित विदेशी, दोषसिद्ध विदेशी या हाल के अवैध घुसपैठिए थे।
विधायक का सवाल और सरकार का जवाब
विधानसभा में एआईयूडीएफ विधायक बदरुद्दीन अजमल ने इस प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए निर्वासन की कानूनी प्रक्रिया, न्यायिक अपील और बांग्लादेश से समन्वय की जानकारी मांगी। सरकार ने स्पष्ट किया कि नागरिकता और विदेशी सरकारों से समन्वय पूरी तरह केंद्र सरकार का विषय है, जबकि राज्य सरकार केवल केंद्र के निर्देशों और कानून के अनुसार कार्रवाई करती है। साथ ही यह भी कहा गया कि पूरी प्रक्रिया के दौरान मानवाधिकारों की रक्षा के लिए आवश्यक सावधानियां बरती जाती हैं। कांग्रेस और एआईयूडीएफ लगातार इस अभियान का विरोध कर रहे हैं, लेकिन राज्य सरकार का कहना है कि कार्रवाई केवल कानूनी रूप से चिन्हित अवैध विदेशियों के खिलाफ ही की जा रही है।
वैश्विक प्रवासन संकट का हिस्सा
असम की यह कार्रवाई केवल राज्य की सीमा सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वैश्विक अवैध प्रवासन संकट की व्यापक तस्वीर का हिस्सा भी है। यूरोप इस समय इसी तरह के संकट का सामना कर रहा है। स्पेन के उत्तर अफ्रीकी क्षेत्र स्यूटा में हजारों प्रवासियों ने मोरक्को से सीमा पार कर घुसपैठ की, जिससे स्थानीय संसाधनों पर भारी दबाव पड़ा और सीमा सुरक्षा पर गंभीर प्रश्न उठे।
अमेरिका के उपराष्ट्रपति की टिप्पणी
अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने स्यूटा की घटनाओं को पश्चिमी देशों की ढीली सीमा नीतियों का परिणाम बताते हुए कहा कि अनियंत्रित प्रवासन राष्ट्रीय संप्रभुता और आंतरिक स्थिरता को कमजोर करता है। कई देशों में यह धारणा मजबूत हो रही है कि अवैध प्रवासन से आवास, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा, रोजगार और सामाजिक कल्याण योजनाओं पर असाधारण दबाव पड़ता है।
कड़े आव्रजन नियमों की आवश्यकता
इन चुनौतियों को देखते हुए कई देश अब कड़े आव्रजन नियम लागू कर रहे हैं। सरकारों का तर्क है कि राष्ट्रीय संप्रभुता बनाए रखने, सीमाओं पर कानून का शासन स्थापित करने, मानव तस्करी के नेटवर्क को तोड़ने और स्थानीय संसाधनों की रक्षा के लिए सख्त कदम आवश्यक हैं। तेज पहचान, त्वरित प्रत्यावर्तन और अवैध प्रवेश के खिलाफ स्पष्ट कार्रवाई को कई देश अब अपनी दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा बना रहे हैं।
भारत में अवैध घुसपैठ पर कार्रवाई
भारत में भी बांग्लादेशी और रोहिंग्या समेत अवैध घुसपैठ के मुद्दे पर केंद्र सरकार, सुरक्षा एजेंसियां और राज्य सरकारें अधिक सक्रिय हुई हैं। सरकार का कहना है कि कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए केवल उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है जिनकी अवैध स्थिति विधिसम्मत रूप से स्थापित हो चुकी है। इस समय जब दुनिया के कई देश अवैध प्रवासन से उत्पन्न चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, भारत का जोर भी वैध आव्रजन व्यवस्था, सीमा सुरक्षा और कानून के प्रभावी अनुपालन पर दिखाई दे रहा है। असम में चल रहा अभियान इसी व्यापक नीति का महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है।
