असम के मुख्यमंत्री ने कांग्रेस के आरोपों को किया खारिज, कानूनी कार्रवाई की चेतावनी

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कांग्रेस के दावों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है, जिसमें उनकी पत्नी के पासपोर्ट से जुड़ी विसंगतियों का जिक्र किया गया था। उन्होंने कहा कि वह और उनकी पत्नी पवन खेड़ा के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेंगे। सरमा ने कांग्रेस के आरोपों को डिजिटल हेरफेर का प्रयास बताया और विश्वास जताया कि सच्चाई की जीत होगी। जानें इस विवाद के पीछे की पूरी कहानी और मुख्यमंत्री का क्या कहना है।
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असम के मुख्यमंत्री ने कांग्रेस के आरोपों को किया खारिज, कानूनी कार्रवाई की चेतावनी

मुख्यमंत्री का स्पष्ट बयान

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने अपनी पत्नी के पासपोर्ट से संबंधित कांग्रेस के आरोपों को पूरी तरह से नकारते हुए कई विसंगतियों की ओर इशारा किया है। उन्होंने यह भी बताया कि वह और उनकी पत्नी कांग्रेस नेता पवन खेड़ा के खिलाफ कानूनी कदम उठाने का इरादा रखते हैं और उन पर मानहानि का मुकदमा दायर करेंगे।


कांग्रेस के दावों में विसंगतियां

मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के माध्यम से कांग्रेस के दावों में छह प्रमुख गलतियों को उजागर किया। इनमें नाम, यूएई आईडी और राष्ट्रीयता से संबंधित जानकारियों में भारी असंगति शामिल है। सरमा ने इन दस्तावेजों को डिजिटल हेरफेर का एक घटिया प्रयास बताया।


पवन खेड़ा के खिलाफ कड़ी प्रतिक्रिया

हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि सच्चाई की जीत होगी और गलत जानकारी फैलाने वालों को जवाबदेह ठहराया जाएगा। उन्होंने विश्वास जताया कि पवन खेड़ा का झूठ का सिलसिला अब समाप्त होने वाला है और अंततः उन्हें जेल जाना पड़ेगा।


कांग्रेस की हताशा का संकेत

एक अन्य पोस्ट में, मुख्यमंत्री ने कहा कि पवन खेड़ा की प्रेस कॉन्फ्रेंस कांग्रेस के भीतर की गहरी हताशा और घबराहट को दर्शाती है। उन्होंने यह भी कहा कि असम एक ऐतिहासिक जनादेश की ओर बढ़ रहा है, जिसे देखकर विपक्षी दल बौखला गए हैं और बेबुनियाद हमले कर जनता को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं।


कांग्रेस के गंभीर आरोप

इससे पहले, कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाया था कि मुख्यमंत्री की पत्नी के पास तीन अलग-अलग देशों के पासपोर्ट हैं और उन्होंने अपनी संपत्तियों की जानकारी भी छिपाई है। कांग्रेस ने कुछ दस्तावेज पेश करते हुए चुनाव आयोग से मांग की थी कि चुनावी हलफनामे में जानकारी छिपाने के आधार पर मुख्यमंत्री का नामांकन रद्द किया जाए।


ट्विटर पर मुख्यमंत्री का बयान