असम के मुख्यमंत्री का विवादास्पद बयान: क्रांतिकारी चित्रण पर नई बहस
मुख्यमंत्री का विवादास्पद बयान
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने हाल ही में एक विवादास्पद बयान दिया है, जिसमें उन्होंने कहा कि यदि असम के लोग सार्वजनिक स्थानों पर किसी क्रांतिकारी की तस्वीर बनाना चाहते हैं, तो उन्हें लातिन अमेरिकी मार्क्सवादी क्रांतिकारी चे ग्वेरा के बजाय उल्फा (I) के नेता परेश बरुआ की तस्वीर बनानी चाहिए। इस बयान ने राज्य में एक नया राजनीतिक और सांस्कृतिक विवाद उत्पन्न कर दिया है। यह विवाद तब शुरू हुआ जब असम के प्रसिद्ध गायक और अभिनेता ज़ुबीन गर्ग की एक म्यूरल को हटाया गया।
ज़ुबीन गर्ग की पेंटिंग का विवाद
सरमा ने ज़ुबीन गर्ग की तस्वीरों पर रोक लगाने का भी इशारा किया, यह कहते हुए कि उनकी पत्नी गरिमा सैकिया गर्ग ही उनकी तस्वीर का आधिकारिक संस्करण जारी करेंगी। ज़ुबीन गर्ग की म्यूरल को हटाने के बाद, असम में शोक का माहौल बना रहा, क्योंकि उनकी मौत के बाद लाखों लोगों ने उनके गाने 'मायाबिनी' को सामूहिक रूप से गाया था।
सरमा का बयान और प्रतिक्रिया
सरमा ने कहा कि जिन लोगों ने म्यूरल हटाई, वे असली असमी लोग थे और उन्होंने यह भी कहा कि पेंटिंग ज़ुबीन की नहीं लग रही थी। उन्होंने सुझाव दिया कि अगर किसी क्रांतिकारी की तस्वीर बनानी है, तो परेश बरुआ और पराग दास की तस्वीरें बनाई जानी चाहिए। सरमा ने कहा कि बरुआ 30 वर्षों से संघर्ष कर रहे हैं, चाहे वह सही हो या गलत।
ग्वेरा और बरुआ की तुलना
हालांकि, सरमा ने ग्वेरा को कमतर आंका, जो एक प्रसिद्ध अर्जेंटीनी क्रांतिकारी हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें ग्वेरा के बारे में जानकारी नहीं थी, लेकिन बाद में उन्होंने उनके बारे में पढ़ा। सरमा ने यह भी कहा कि गुवाहाटी में ज़ुबीन की म्यूरल को हटाने का निर्णय सौंदर्यीकरण अभियान के तहत लिया गया था।
सरमा का कलाकारों के प्रति दृष्टिकोण
सरमा ने यह भी कहा कि सरकार सार्वजनिक स्थानों पर ज़ुबीन गर्ग की केवल एक विशेष तस्वीर बनाने की अनुमति देगी। गरिमा ने म्यूरल को हटाने पर सवाल उठाया था, यह पूछते हुए कि क्या ज़ुबीन की तस्वीर गुवाहाटी को 'गंदा' दिखा रही थी।
