अशोक गहलोत का 75वां जन्मदिन: एक राजनीतिक सफर की कहानी

राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत आज 75वां जन्मदिन मना रहे हैं। उनके राजनीतिक सफर की शुरुआत छात्र राजनीति से हुई थी, और उन्होंने कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया है। गहलोत को राजनीति का जादूगर माना जाता है, जिन्होंने कई बार चुनौतियों का सामना किया। जानें उनके जीवन और उपलब्धियों के बारे में इस लेख में।
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अशोक गहलोत का 75वां जन्मदिन: एक राजनीतिक सफर की कहानी gyanhigyan

अशोक गहलोत का जन्मदिन

राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत आज, 03 मई को अपने 75वें जन्मदिन का जश्न मना रहे हैं। उनकी शांत स्वभाव, दृढ़ संकल्प, हास्यपूर्ण व्यक्तित्व और गंभीर दृष्टिकोण के लिए उन्हें कांग्रेस के प्रमुख नेताओं में गिना जाता है। गहलोत गांधी परिवार के करीबी सहयोगियों में से एक माने जाते हैं। उनके राजनीतिक करियर की बात करें तो उन्होंने 5 बार सांसद, 3 बार केंद्रीय मंत्री, 3 बार प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष, 2 बार कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव, 5 बार विधायक और 3 बार राजस्थान के मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया है।


जन्म और शिक्षा

अशोक गहलोत का जन्म 03 मई 1951 को जोधपुर, राजस्थान में हुआ। उन्होंने 12वीं कक्षा तक की पढ़ाई पूरी करने के बाद व्यास यूनिवर्सिटी में दाखिला लिया। गहलोत ने वहां विज्ञान और कानून में स्नातक की डिग्री प्राप्त की। इसके बाद, उन्होंने अर्थशास्त्र में मास्टर डिग्री हासिल की।


राजनीतिक यात्रा

गहलोत ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत कॉलेज के दिनों में छात्र राजनीति से की। 1973 में, वह एनएसयूआई में शामिल हुए और 1973 से 1979 तक राजस्थान के प्रदेश अध्यक्ष रहे। इसके बाद, 1979 से 1982 तक जोधपुर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष बने। 26 साल की उम्र में उन्होंने सरदारशहर से चुनाव लड़ा, लेकिन हार का सामना करना पड़ा।


1980 में कांग्रेस ने उन्हें उम्मीदवार बनाया, और उन्होंने जीत हासिल की। इसके बाद, गहलोत 1984, 1991, 1996 और 1998 में लगातार 5 बार सांसद चुने गए। कांग्रेस नीत केंद्र सरकार में उन्होंने कई महत्वपूर्ण मंत्रिमंडलों में कार्य किया और कई जिम्मेदारियों का निर्वहन किया।


राजनीति के जादूगर

अशोक गहलोत को राजनीति का जादूगर कहा जाता है, और उन्होंने कई मौकों पर इसे साबित किया है। 1998 में कांग्रेस ने राजस्थान में 158 सीटें जीतीं, और गहलोत को मुख्यमंत्री के रूप में चुना गया। वह 1998 में पहली बार राज्य के मुख्यमंत्री बने। 2008 में, कांग्रेस ने फिर से बहुमत हासिल किया और गहलोत को दूसरी बार मुख्यमंत्री चुना गया। 2018 में, उन्होंने तीसरी बार मुख्यमंत्री का पद संभाला।


हालांकि, गहलोत का राजनीतिक जीवन हमेशा आसान नहीं रहा। उन्हें विरोधी दलों के खिलाफ लड़ाई लड़नी पड़ी और पार्टी के भीतर भी कई बार चुनौतियों का सामना करना पड़ा। कई बार ऐसा लगा कि उनका राजनीतिक सफर खतरे में है, लेकिन गहलोत ने हर बार स्थिति को संभाल लिया।