अवैध निर्माण को लेकर अदालत का कड़ा फैसला, चार दोषी जेल भेजे गए
सख्त संदेश: अवैध निर्माण के खिलाफ अदालत की कार्रवाई
सिटापुर: अवैध तरीके से किसी के घर को ढहाने का प्रयास करने वालों के खिलाफ अदालत ने कड़ा संदेश दिया है। पिसावां थाना क्षेत्र में 13 साल पहले एक मकान को तोड़ने के मामले में अपीलीय अदालत ने दोषियों की अपील को खारिज करते हुए निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा है। इस निर्णय के बाद, चारों आरोपियों को हिरासत में लेकर जेल भेज दिया गया है।
यह मामला 2013 का है, जब पिसावां ग्राम के निवासी राम नरेश सिंह ने 11 जून को थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि पिसावां चौराहे के निवासी नत्थू और उसके दो बेटे सुनील तथा सुधीर, साथ ही सेजकला निवासी रविंद्र ने मिलकर उनके प्लॉट पर बने मकान को जेसीबी से तोड़ना शुरू कर दिया। जब राम नरेश ने इसका विरोध किया, तो आरोपियों ने उन्हें जान से मारने की धमकी दी। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आईपीसी की धारा 427 और 506 के तहत मामला दर्ज किया।
निचली अदालत का फैसला: दो साल की सजा
लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद, पिछले साल 15 अक्टूबर को सिविल जज सीनियर डिवीजन विजय भान ने चारों आरोपियों को आईपीसी की धारा 427 के तहत दोषी ठहराते हुए दो साल की साधारण कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही, प्रत्येक पर 500 रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया। हालांकि, जान से मारने की धमकी के आरोप में उन्हें बरी कर दिया गया।
जिला जज का निर्णय: अपील खारिज
निचली अदालत के फैसले के खिलाफ चारों दोषियों ने सेशन कोर्ट में अपील की थी, लेकिन जनपद न्यायाधीश आशीष जैन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए उनकी अपील को खारिज कर दिया। जिला जज ने सिविल जज के फैसले को पूरी तरह से मान्यता दी। अपीलीय अदालत के निर्णय के बाद, पुलिस ने तुरंत सभी दोषियों को हिरासत में लेकर जेल भेज दिया। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यह फैसला उन अपराधियों के लिए एक उदाहरण है जो दूसरों के घरों पर नजर रखते हैं।
