अवैध निर्माण के खिलाफ अदालत का कड़ा फैसला, चार दोषी जेल भेजे गए

सिटापुर में एक अदालत ने अवैध रूप से किसी के मकान को गिराने के मामले में चार आरोपियों को जेल भेज दिया है। यह मामला 2013 का है, जब आरोपियों ने एक व्यक्ति के प्लॉट पर जेसीबी से तोड़फोड़ की थी। निचली अदालत के फैसले को अपीलीय अदालत ने बरकरार रखा, जिससे यह स्पष्ट होता है कि अवैध निर्माण के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। जानें इस मामले की पूरी जानकारी और अदालत के फैसले के पीछे की कहानी।
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सख्त संदेश: अवैध निर्माण करने वालों के खिलाफ कार्रवाई

अवैध निर्माण के खिलाफ अदालत का कड़ा फैसला, चार दोषी जेल भेजे गए


सिटापुर: अवैध रूप से किसी के घर को जेसीबी से गिराने वाले आरोपियों के खिलाफ अदालत ने कड़ा संदेश दिया है। पिसावां थाना क्षेत्र में 13 साल पहले एक मकान को ध्वस्त करने के मामले में अपीलीय अदालत ने दोषियों की अपील को खारिज करते हुए निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा है। जिला जज के इस निर्णय के बाद चारों आरोपियों को हिरासत में लेकर जेल भेज दिया गया है।


यह मामला 2013 का है। पिसावां के निवासी राम नरेश सिंह ने 11 जून 2013 को थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि पिसावां चौराहा के नत्थू और उसके दो बेटों सुनील और सुधीर, तथा सेजकला के रविंद्र ने मिलकर उनके प्लॉट पर बने मकान को जेसीबी से तोड़ना शुरू कर दिया। जब राम नरेश ने इसका विरोध किया, तो आरोपियों ने उन्हें जान से मारने की धमकी दी। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आईपीसी की धारा 427 और 506 के तहत मामला दर्ज किया।


निचली अदालत का फैसला: दो साल की सजा


लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद, पिछले साल 15 अक्टूबर 2025 को सिविल जज सीनियर डिवीजन विजय भान ने इस मामले में फैसला सुनाया। अदालत ने चारों आरोपियों—नत्थू, सुनील, सुधीर और रविंद्र को आईपीसी की धारा 427 के तहत दोषी ठहराते हुए दो साल की साधारण कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही उन पर पांच-पांच सौ रुपये का जुर्माना भी लगाया गया। हालांकि, जान से मारने की धमकी के आरोप में उन्हें बरी कर दिया गया।



जिला जज का निर्णय: अपील खारिज


निचली अदालत के फैसले के खिलाफ चारों दोषियों ने सेशन कोर्ट में अपील की थी। लेकिन जनपद न्यायाधीश आशीष जैन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए उनकी अपील को खारिज कर दिया। जिला जज ने सिविल जज सीनियर डिवीजन विजय भान के फैसले को पूरी तरह से मान्यता दी। अपीलीय अदालत के आदेश के बाद, पुलिस ने तुरंत सभी दोषियों को हिरासत में लेकर जेल भेज दिया। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यह फैसला उन अपराधियों के लिए एक उदाहरण है जो दूसरों के घरों पर नजर रखते हैं।