अयोध्या राम मंदिर दान चोरी मामले में संपत्तियों की जांच जारी

अयोध्या में राम मंदिर के लिए मिले दान की चोरी की जांच में नए सुराग सामने आए हैं। अधिकारियों ने आरोपी अनुकल्प मिश्रा और उनके जीजा से जुड़ी संपत्तियों की पहचान की है। जांच में यह पता लगाया जा रहा है कि क्या चोरी किए गए दान के पैसे का उपयोग संपत्तियों की खरीद में किया गया था। पुलिस और विशेष जांच टीम वित्तीय लेन-देन की जांच कर रही है, जिससे और भी खुलासे होने की उम्मीद है। जानें इस मामले में क्या नया सामने आया है।
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संपत्तियों से जुड़ा नया सुराग

अयोध्या में राम मंदिर के लिए प्राप्त दान की कथित चोरी की जांच में एक महत्वपूर्ण सुराग सामने आया है। अधिकारियों ने आरोपी से संबंधित कई संपत्तियों की पहचान की है, जिससे यह सवाल उठता है कि क्या चोरी किए गए दान के पैसे का उपयोग इन संपत्तियों की खरीद में किया गया था। अयोध्या प्रशासन इस मामले में चल रही जांच के तहत इन संपत्तियों की गहनता से जांच कर रहा है।


अनुकल्प मिश्रा पर जांच की नजर

अनुकल्प मिश्रा जांच के घेरे में

अधिकारियों को जानकारी मिली है कि सबसे अधिक संपत्तियां आरोपी अनुकल्प मिश्रा और उनके जीजा लवकुश मिश्रा से जुड़ी हुई हैं। सूत्रों के अनुसार, अब तक इन दोनों से संबंधित कम से कम 12 संपत्तियों की पहचान की जा चुकी है। इन संपत्तियों की कुल कीमत कई करोड़ रुपये बताई जा रही है। अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि इनमें से कौन सी संपत्तियां पुश्तैनी हैं और कौन सी हाल ही में खरीदी गई हैं। जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपियों के पास न केवल अयोध्या में, बल्कि आस-पास के क्षेत्रों जैसे बसावा, मिल्कीपुर और रुदौली में भी संपत्तियां हैं। कुछ संपत्तियां आरोपियों के नाम पर रजिस्टर्ड हैं, जबकि अन्य परिवार के सदस्यों के नाम पर खरीदी गई हैं।


जांच की प्रक्रिया जारी

व्यापक जांच अभी भी जारी है

राम मंदिर में दान की चोरी के मामले में चल रही व्यापक जांच के साथ-साथ संपत्तियों से संबंधित जांच भी जारी है। पुलिस और विशेष जांच टीम (SIT) वित्तीय लेन-देन, बैंक खातों और मंदिर के दान प्रबंधन की जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या इसमें कोई बड़ी व्यवस्थागत खामी थी या अन्य लोग भी शामिल थे। अधिकारियों का कहना है कि जांच जारी है और वित्तीय व संपत्ति से जुड़े रिकॉर्ड की बारीकी से जांच करने पर और भी खुलासे होने की संभावना है। इस दौरान, पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों के बैंक खातों की गहनता से जांच कर रही है। प्रारंभिक जांच से पता चला है कि चोरी किए गए पैसे का उपयोग या तो बैंक खातों में जमा करने या संपत्तियों की खरीद में किया गया था। सबसे महत्वपूर्ण खुलासा यह है कि आरोपी अपने बैंक खातों में जमा बड़ी राशि के बारे में संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दे पा रहे हैं। पुलिस अब उनके बैंक लेन-देन के आधार पर लगातार उनसे पूछताछ कर रही है।