अयोध्या राम जन्मभूमि मंदिर में दान की रकम में वित्तीय गड़बड़ियों की जांच शुरू

अयोध्या राम जन्मभूमि मंदिर में भक्तों द्वारा चढ़ाए गए दान में वित्तीय गड़बड़ियों के आरोपों की जांच के लिए योगी सरकार ने SIT का गठन किया है। पूर्व अकाउंट्स ऑफिसर ने गंभीर आरोप लगाए हैं, जिसमें दान की गिनती में अनियमितताओं का जिक्र है। ट्रस्ट ने पारदर्शी जांच की मांग की है, जबकि महासचिव ने आरोपों का खंडन किया है। इस मामले में गहन पूछताछ जारी है, जिससे श्रद्धालुओं की आस्था को बनाए रखने की कोशिश की जा रही है।
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अयोध्या राम जन्मभूमि मंदिर में दान की रकम में वित्तीय गड़बड़ियों की जांच शुरू gyanhigyan

अयोध्या राम जन्मभूमि मंदिर में दान की अनियमितताओं की जांच

अयोध्या स्थित राम जन्मभूमि मंदिर से जुड़ी एक महत्वपूर्ण खबर सामने आई है, जिसमें भक्तों द्वारा चढ़ाए गए दान में वित्तीय गड़बड़ियों का आरोप लगाया गया है। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए योगी सरकार ने तुरंत एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। साथ ही, स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने एक युवक को हिरासत में लिया है, जिससे वित्तीय विसंगतियों के बारे में गहन पूछताछ की जा रही है।


श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अनुरोध किया था कि वे इस मामले की उच्च-स्तरीय जांच के लिए SIT का गठन करें। ट्रस्ट का कहना है कि यह मामला देश-विदेश में लाखों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा है, इसलिए एक पारदर्शी और निष्पक्ष जांच आवश्यक है। ट्रस्ट ने यह भी कहा कि स्वतंत्र जांच से सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।


पूर्व अकाउंट्स ऑफिसर के गंभीर आरोप

राज्य सरकार के एक प्रवक्ता ने बताया कि मंदिर के दान-पात्रों में जमा धन की चोरी की खबरों के मद्देनजर ट्रस्ट ने जांच की मांग की थी। पूर्व अकाउंट्स ऑफिसर महिपाल सिंह ने आरोप लगाया कि उन्होंने दान की गिनती के दौरान लगभग 5 लाख रुपये की चोरी को पकड़ा था। उन्होंने कहा कि जब उन्होंने इस मामले की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों को दी, तो उन्हें सहयोग नहीं मिला, बल्कि उन्हें उनके पद से हटा दिया गया।


सिंह ने यह भी आरोप लगाया कि मंदिर परिसर के कुछ सीसीटीवी फुटेज जानबूझकर हटा दिए गए थे और यह भी कहा कि दान की गई सोने, चांदी और अन्य कीमती वस्तुओं का कोई पारदर्शी डिजिटल रिकॉर्ड नहीं था।


ट्रस्ट का खंडन और आंतरिक समीक्षा

ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने पूर्व लेखा अधिकारी के सभी आरोपों का खंडन किया है। राय के अनुसार, दान इकट्ठा करने और उसकी गिनती की प्रक्रिया पूरी तरह से कंप्यूटरीकृत और पारदर्शी है। उन्होंने कहा कि इस प्रणाली का नियमित रूप से स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के अधिकारियों द्वारा ऑडिट किया जाता है और अब तक किसी बड़े वित्तीय हेराफेरी का कोई सबूत नहीं मिला है। हालांकि, विवाद के चलते ट्रस्ट ने एक आंतरिक समीक्षा शुरू की है, जिसमें सीसीटीवी फुटेज की दोबारा जांच और नकदी संभालने की प्रक्रियाओं की पड़ताल शामिल है।