अमेरिका ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में बड़ा बदलाव किया

अमेरिका ने हाल ही में वैश्विक ऊर्जा बाजार में एक महत्वपूर्ण बदलाव किया है, जिससे यह दुनिया का सबसे बड़ा तेल निर्यातक बन गया है। सऊदी अरब और रूस को पीछे छोड़ते हुए, अमेरिका ने अपने तेल और गैस उत्पादन में वृद्धि की है। इस बदलाव के पीछे कई कारक हैं, जिनमें ईरान युद्ध और अन्य वैश्विक घटनाएं शामिल हैं। यह स्थिति न केवल ऊर्जा बाजार को प्रभावित कर रही है, बल्कि अमेरिका की वैश्विक शक्ति को भी नया आयाम दे रही है। यूरोप और रूस इस बदलाव को लेकर चिंतित हैं, जिससे वैश्विक ऊर्जा संतुलन में बदलाव आ रहा है।
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अमेरिका का ऊर्जा निर्यात में शीर्ष स्थान

अमेरिका ने वैश्विक ऊर्जा इतिहास में एक महत्वपूर्ण बदलाव किया है। अब यह दुनिया का सबसे बड़ा तेल निर्यातक बन गया है, जिसने सऊदी अरब और रूस को पीछे छोड़ दिया है। यह परिवर्तन उस समय की तुलना में बेहद चौंकाने वाला है जब अमेरिका मध्य पूर्व के तेल पर निर्भर था। 1973 में अरब तेल प्रतिबंध ने अमेरिका की ऊर्जा नीति पर गहरा प्रभाव डाला। इस निर्भरता ने कई वर्षों तक विदेश नीति को प्रभावित किया। 2010 के आसपास, अमेरिका में शेल तेल और गैस उत्पादन में तेजी आई, जिससे यह उत्पादन में शीर्ष स्थान पर पहुंच गया। लेकिन निर्यात में शीर्ष बनना एक अलग चुनौती थी, जो हाल ही में पूरी हुई।


ईरान युद्ध ने संतुलन को बदल दिया

अमेरिका की स्थिति में सुधार के पीछे कई कारक हैं। वर्तमान में चल रहे अमेरिका-ईरान युद्ध ने सऊदी अरब के तेल निर्यात को प्रभावित किया है। वहीं, यूक्रेन में ड्रोन हमलों और अमेरिकी प्रतिबंधों ने रूस के निर्यात को भी नुकसान पहुंचाया है। इन दोनों देशों की समस्याओं के कारण, अमेरिका का कच्चा तेल और ईंधन निर्यात मई में लगभग 10.5 मिलियन बैरल प्रति दिन तक पहुंच गया। यह आंकड़ा अमेरिका को लगातार तीसरे महीने शीर्ष निर्यातक बना रहा।


वाशिंगटन के लिए नई शक्ति का साधन

इस बदलाव के प्रभाव केवल तेल बाजार तक सीमित नहीं हैं। अमेरिका पहले से ही डॉलर की स्थिति के कारण वैश्विक वित्त में प्रमुख है और सैन्य शक्ति का प्रदर्शन करता है। ऊर्जा निर्यात अब इस प्रभाव में एक नया आयाम जोड़ता है। "वाशिंगटन के पास अब एक नया उपकरण है, जिसे उन्होंने ईरान युद्ध से पहले नहीं पहचाना था," नीति विशेषज्ञ मिशेल ब्रौहार्ड ने कहा। अमेरिका अब यूरोप का सबसे बड़ा कच्चे तेल का आपूर्तिकर्ता है।


ओपेक की पकड़ कमजोर हो रही है

अमेरिका का निर्यात में बढ़ता हुआ स्थान ओपेक की लंबे समय से चली आ रही शक्ति को चुनौती दे रहा है। राष्ट्रपति ट्रंप ने वर्षों से इस समूह पर बाजारों में हेरफेर करने का आरोप लगाया है। इस बीच, संयुक्त अरब अमीरात ने ओपेक से बाहर निकलने का निर्णय लिया है, जिससे संगठन को एक बड़ा झटका लगा है।


यूरोप और रूस की चिंता

हालांकि, सभी इस बदलाव का स्वागत नहीं कर रहे हैं। यूरोपीय अधिकारी अब अमेरिका की ऊर्जा पर निर्भरता को लेकर चिंतित हैं। रूस ने भी अपनी निराशा व्यक्त की है, और क्रेमलिन के तेल दिग्गज रोसनेफ्ट के प्रमुख इगोर सेचिन ने कहा है कि अमेरिका की ऊर्जा कंपनियां इस स्थिति का लाभ उठा रही हैं।


यहां तक कैसे पहुंचे?

2015 में अमेरिका ने 40 साल का तेल निर्यात प्रतिबंध हटा दिया था। उस समय कई विश्लेषकों ने संदेह जताया था कि अमेरिका के शेल क्षेत्र अपनी वृद्धि को बनाए रख सकेंगे। लेकिन एक दशक बाद, उन संदेहों को गलत साबित कर दिया गया है। वैश्विक तेल मांग पिछले वर्ष 104 मिलियन बैरल प्रति दिन तक पहुंच गई है।

(रायटर से इनपुट के साथ)