अमेरिका ने ईरानी और रूसी तेल पर छूट को समाप्त किया

अमेरिका ने होर्मुज नाकाबंदी के बीच ईरानी और रूसी तेल पर दी गई छूट को समाप्त करने का निर्णय लिया है। इस कदम का प्रभाव भारत सहित कई देशों पर पड़ेगा, जो इस छूट का लाभ उठा रहे थे। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने इस बात की पुष्टि की है कि अब भारत को रूस से सस्ता तेल खरीदने में कठिनाई होगी। जानें इस निर्णय के पीछे की वजहें और इसके संभावित परिणाम।
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अमेरिका का बड़ा निर्णय

अमेरिका ने होर्मुज नाकाबंदी के बीच एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है, जिसका प्रभाव कई देशों पर पड़ेगा। अब अमेरिका ने उस छूट को नवीनीकरण नहीं करने का निर्णय लिया है, जो भारत को रूसी तेल खरीदने की अनुमति देती थी। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने इस बात की पुष्टि की है कि अमेरिका उन देशों को रूसी और ईरानी कच्चे तेल की खरीद पर दी गई छूट को आगे नहीं बढ़ाएगा।


वित्त मंत्री का बयान

एक प्रेस ब्रीफिंग में, स्कॉट बेसेंट ने कहा कि वॉशिंगटन इस हफ्ते समाप्त हो रही ईरानी तेल पर समुद्री प्रतिबंधों की छूट को आगे नहीं बढ़ाएगा। इसी तरह, रूसी तेल पर दी गई छूट भी समाप्त हो जाएगी। यह निर्णय ट्रंप प्रशासन की उन कोशिशों का अंत दर्शाता है, जिसमें प्रतिबंधों में छूट देकर तेल की आपूर्ति बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा था।


भारत पर प्रभाव

भारत भी इस छूट का एक बड़ा लाभार्थी था। अमेरिकी छूट के बाद, भारत ने रूस से लगभग 3 करोड़ बैरल तेल का ऑर्डर दिया था। अब, भारत को रूस से सस्ता तेल खरीदने में कठिनाई होगी।


अमेरिका का निर्णय क्यों?

अमेरिका ने यह निर्णय होर्मुज बंद होने के कारण लिया था, ताकि वैश्विक ऊर्जा दर और तेल आपूर्ति को स्थिर रखा जा सके। अब इस छूट के समाप्त होने का मतलब है कि ईरानी और रूसी तेल खरीदने वाले देशों के लिए यह एक बड़ा झटका है।


ईरान को मिली छूट

मार्च में लागू की गई छूट के तहत, ईरान को 20 मार्च से पहले लोड किए गए तेल को बेचने की अनुमति दी गई थी। यह कदम वैश्विक आपूर्ति की चिंता को कम करने के लिए उठाया गया था।


30 दिन की छूट का महत्व

12 मार्च को अमेरिकी ट्रेजरी डिपार्टमेंट ने 30 दिन की छूट जारी की थी, जिससे भारतीय रिफाइनर रूस से तेल खरीद सकें। यह कदम मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच वैश्विक ऊर्जा बाजार को स्थिर करने के लिए उठाया गया था।


ईरान के साथ सीजफायर

स्कॉट बेसेंट ने कहा था कि अमेरिका भारत को एक 'जरूरी साझेदार' मानता है और उम्मीद करता है कि नई दिल्ली अमेरिकी तेल की खरीद बढ़ाएगा। ईरान और अमेरिका के बीच 15 दिनों का सीजफायर भी चल रहा है।