अमेरिका की यूरोप को हथियार सप्लाई में देरी: ईरान युद्ध का प्रभाव

अमेरिका ने कुछ यूरोपीय देशों को हथियारों की सप्लाई में देरी करने का निर्णय लिया है, जिसका मुख्य कारण ईरान के साथ चल रहा युद्ध है। इस निर्णय का प्रभाव बाल्टिक और स्कैंडिनेविया के देशों पर पड़ेगा। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि ये हथियार मध्य पूर्व के युद्ध के लिए आवश्यक हैं। यूरोपीय देशों में इस देरी को लेकर असंतोष बढ़ रहा है, और कुछ देश अब स्थानीय स्तर पर हथियार खरीदने पर विचार कर रहे हैं। जानें इस मुद्दे पर और क्या जानकारी सामने आई है।
 | 
अमेरिका की यूरोप को हथियार सप्लाई में देरी: ईरान युद्ध का प्रभाव gyanhigyan

हथियारों की सप्लाई में देरी का निर्णय

अमेरिका ने कुछ यूरोपीय देशों को हथियारों की आपूर्ति में देरी करने का निर्णय लिया है। इसका मुख्य कारण ईरान के साथ चल रहा युद्ध है, जिसके चलते अमेरिका के हथियार और गोला-बारूद का भंडार तेजी से घट रहा है। हाल ही में, अमेरिकी अधिकारियों ने अपने यूरोपीय सहयोगियों को सूचित किया कि पहले से निर्धारित कुछ हथियारों की डिलीवरी अब समय पर नहीं हो सकेगी।


बाल्टिक और स्कैंडिनेविया पर प्रभाव

अमेरिका की यूरोप को हथियार सप्लाई में देरी: ईरान युद्ध का प्रभाव
अमेरिका के हथियार भंडार पर दबाव, यूरोप को सप्लाई में कर रहा देरी… क्या ईरान युद्ध इसकी वजह?


रिपोर्ट के अनुसार, इस निर्णय का प्रभाव बाल्टिक क्षेत्र और स्कैंडिनेविया के कई देशों पर पड़ेगा। इनमें से कई हथियार फॉरेन मिलिट्री सेल्स प्रोग्राम (FMS) के तहत खरीदे गए थे, जिसमें अमेरिका अन्य देशों को हथियारों की आपूर्ति करता है। लेकिन अब इन हथियारों की डिलीवरी में देरी हो रही है।


सुरक्षा कारणों से देशों के नाम गुप्त

सूत्रों के अनुसार, जिन देशों को इस देरी का सामना करना पड़ रहा है, उनके नाम सुरक्षा कारणों से नहीं बताए गए हैं। इनमें से कुछ देश रूस की सीमा के निकट स्थित हैं। देरी होने वाले हथियारों में विभिन्न प्रकार के गोला-बारूद शामिल हैं, जो हमले और रक्षा दोनों में उपयोगी हो सकते हैं।


व्हाइट हाउस और पेंटागन की प्रतिक्रिया

इस मामले पर व्हाइट हाउस और विदेश विभाग से पूछे गए सवालों का जवाब देते हुए कहा गया कि पेंटागन इस पर जानकारी प्रदान करेगा। हालांकि, पेंटागन ने भी इस पर कोई स्पष्ट उत्तर नहीं दिया। यह देरी इस बात का संकेत है कि ईरान युद्ध के कारण अमेरिकी संसाधनों पर कितना दबाव पड़ा है। यूरोपीय अधिकारियों का मानना है कि इससे उनकी सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।


यूरोपीय देशों में बढ़ती असंतोष

अमेरिका ने पहले ही यूरोपीय देशों पर अधिक अमेरिकी हथियार खरीदने का दबाव डाला है, ताकि यूरोप अपनी सुरक्षा की जिम्मेदारी स्वयं उठाए। लेकिन बार-बार हो रही देरी से यूरोपीय देशों में असंतोष बढ़ रहा है। कुछ देश अब यूरोप में निर्मित हथियार खरीदने पर विचार कर रहे हैं।


अमेरिकी अधिकारियों का स्पष्टीकरण

अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि वर्तमान में ये हथियार मध्य पूर्व के युद्ध के लिए आवश्यक हैं। उन्होंने यह भी बताया कि यूरोपीय देशों ने होर्मुज स्ट्रेट को खोलने में अमेरिका और इजराइल की अपेक्षित मदद नहीं की। ईरान युद्ध से पहले ही अमेरिका अपने हथियारों का एक बड़ा हिस्सा उपयोग कर चुका था। 2022 में रूस के यूक्रेन पर हमले और 2023 में गाजा में इजराइल के अभियान के दौरान अमेरिका ने बड़ी मात्रा में हथियारों की आपूर्ति की थी।


ईरान के हमले और अमेरिकी रक्षा प्रणाली

ईरान ने युद्ध के दौरान खाड़ी देशों पर सैकड़ों बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन से हमले किए। इनमें से अधिकांश हमलों को रोकने के लिए PAC-3 पैट्रियट मिसाइल इंटरसेप्टर्स का उपयोग किया गया। यह प्रणाली यूक्रेन भी अपनी सुरक्षा के लिए इस्तेमाल करता है।