अमेरिका-ईरान सीजफायर: शांति या युद्ध का खेल?
सीजफायर के बावजूद जारी संघर्ष
अमेरिका और ईरान के बीच घोषित सीजफायर के बावजूद स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। इस समझौते में कई शर्तें शामिल हैं, और इजराइल इस सीजफायर का उल्लंघन कर रहा है। ईरान में बमबारी नहीं हो रही है, लेकिन ईरान समर्थित हिज्बुल्लाह के ठिकानों पर लेबनान में लगातार हमले हो रहे हैं। सवाल यह उठता है कि क्या ट्रंप दो अलग-अलग नीतियों पर चल रहे हैं। एक ओर वे सीजफायर का दावा कर रहे हैं, जबकि दूसरी ओर लेबनान में बमबारी पर अमेरिका की प्रतिक्रिया शर्तों पर आधारित है।
लेबनान में हिज्बुल्लाह पर हमले
लेबनान में 10 मिनट के भीतर हिज्बुल्लाह के 100 से अधिक ठिकानों पर हमले किए गए। इन हमलों में हिज्बुल्लाह के कमांड सेंटर्स और सैन्य स्थलों को निशाना बनाया गया। इस दौरान 24 घंटे में 250 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें से 91 लोग बेरूत में मारे गए हैं। सीजफायर के बाद इजराइल ने 160 से अधिक बम गिराए हैं।
IDF की रणनीति
हिज्बुल्लाह की एक मीटिंग Zoom पर हो रही थी, जिसमें 100 से अधिक लोग शामिल थे। IDF ने इस मीटिंग की लोकेशन का पता लगाया और एक साथ हमले किए। इसके अलावा, बेरूत में एक रेस्टोरेंट पर भी बड़ा हमला हुआ, जिससे पूरा क्षेत्र धुएं में लिपट गया।
सीजफायर के टूटने की संभावनाएं
क्या अमेरिका और ईरान का सीजफायर टूट जाएगा? इसके पीछे 5 मुख्य कारण हैं:
- पहला कारण: अमेरिका का कहना है कि लेबनान सीजफायर की शर्तों में नहीं आता, जबकि ईरान का दावा है कि यह शर्तों में शामिल था।
- दूसरा कारण: ईरान के लवान द्वीप पर UAE ने बमबारी की, जिसके जवाब में ईरान ने बहरीन और कुवैत में हमले किए।
- तीसरा कारण: सीजफायर के बावजूद होर्मुज जलडमरूमध्य अब तक खुला नहीं है। अमेरिका इस मामले में लगातार दबाव बना रहा है।
- चौथा कारण: ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर भी बातचीत में गतिरोध है। ईरान का कहना है कि उसे यूरेनियम संवर्धन का अधिकार नहीं दिया गया है।
- पांचवां कारण: अमेरिका और ईरान के बीच भड़काऊ बयानबाजी जारी है, जिससे स्थिति और भी तनावपूर्ण हो गई है।
