अमित शाह ने पश्चिम बंगाल में गोरखा समुदाय के मुद्दे का संवैधानिक समाधान का आश्वासन दिया

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पश्चिम बंगाल में गोरखा समुदाय के मुद्दे का संवैधानिक समाधान देने का आश्वासन दिया है। उन्होंने चुनावी सभा में आरोप लगाया कि कुछ नेता एक-दूसरे के एजेंट हैं और मस्जिद निर्माण की अनुमति नहीं देंगे। शाह ने किसानों को आलू की आपूर्ति की अनुमति देने और राजनीतिक हिंसा समाप्त करने का वादा किया। इसके अलावा, उन्होंने उत्तरी बंगाल में विभिन्न संस्थानों की स्थापना की योजनाओं का भी उल्लेख किया। जानें उनके अन्य वादों के बारे में।
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अमित शाह ने पश्चिम बंगाल में गोरखा समुदाय के मुद्दे का संवैधानिक समाधान का आश्वासन दिया gyanhigyan

गोरखा समुदाय के मुद्दे पर अमित शाह का बयान

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पश्चिम बंगाल का विभाजन किए बिना दार्जिलिंग पहाड़ियों में गोरखा समुदाय के मुद्दे का संवैधानिक समाधान निकालेगी।


उत्तरी बंगाल के दक्षिण दिनाजपुर जिले के गंगारामपुर में एक चुनावी सभा में बोलते हुए, उन्होंने आरोप लगाया कि आम जनता उन्नयन पार्टी के संस्थापक हुमायूं कबीर और तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी एक-दूसरे के ‘एजेंट’ हैं। शाह ने कहा कि ये लोग बाबरी मस्जिद की तर्ज पर मुर्शिदाबाद में मस्जिद का निर्माण करवा रहे हैं।


उन्होंने कहा, ‘‘भाजपा मस्जिद के निर्माण की अनुमति नहीं देगी।’’


अमित शाह ने यह भी आश्वासन दिया कि पश्चिम बंगाल से अन्य राज्यों को आलू की आपूर्ति की अनुमति दी जाएगी, जिससे किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिल सके।


उन्होंने कहा, ‘‘भाजपा सरकार बनने पर पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हिंसा और सिंडिकेट राज का अंत होगा, और घुसपैठियों को बाहर निकाला जाएगा।’’


शाह ने पार्टी के घोषणापत्र में किए गए वादों को दोहराते हुए कहा कि उत्तरी बंगाल में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), 600 बिस्तर का कैंसर अस्पताल, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) और खेल विश्वविद्यालय की स्थापना की जाएगी।


उन्होंने यह भी कहा कि राजबंशी को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया जाएगा और दार्जिलिंग में एक पारिस्थितिकी अनुकूल रोमांचक खेल केंद्र की स्थापना की जाएगी।