अमित शाह ने जम्मू-कश्मीर की सुरक्षा स्थिति की समीक्षा की, आतंकवाद के खिलाफ सख्त कार्रवाई का निर्देश

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जम्मू-कश्मीर की सुरक्षा स्थिति की समीक्षा करते हुए आतंकवाद के खिलाफ सख्त कार्रवाई का निर्देश दिया। उन्होंने सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क रहने और आपसी समन्वय के साथ कार्य करने का निर्देश दिया। बैठक में आतंकवाद के वित्तपोषण और सीमा पार से होने वाली साजिशों पर चर्चा की गई। अमित शाह ने स्पष्ट किया कि सरकार आतंकवाद के प्रति बर्दाश्त नहीं करने की नीति पर अडिग है। उन्होंने कहा कि स्थायी शांति के लिए सभी संसाधनों का उपयोग किया जाएगा।
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अमित शाह ने जम्मू-कश्मीर की सुरक्षा स्थिति की समीक्षा की, आतंकवाद के खिलाफ सख्त कार्रवाई का निर्देश

जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा स्थिति की समीक्षा

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जम्मू-कश्मीर की सुरक्षा स्थिति पर एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि आतंकवादी ढांचे और आतंकवाद के वित्तपोषण के खिलाफ अभियान को बिना किसी रुकावट के जारी रखना चाहिए। उनका संदेश था कि अब आधे-अधूरे प्रयासों की कोई जगह नहीं है और जम्मू-कश्मीर को जल्द से जल्द आतंकवाद मुक्त बनाने के लिए सभी संसाधनों का उपयोग किया जाएगा।


सुरक्षा एजेंसियों को निर्देश

अमित शाह ने सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क रहने और आपसी समन्वय के साथ कार्य करने का निर्देश दिया ताकि अनुच्छेद 370 के हटने के बाद जो उपलब्धियां हासिल हुई हैं, वे कमजोर न हों। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार इस दिशा में किसी भी स्तर पर संसाधनों की कमी नहीं होने देगी और आवश्यकता पड़ने पर और कड़े कदम उठाए जाएंगे। बैठक में जम्मू-कश्मीर के उप राज्यपाल मनोज सिन्हा, केंद्रीय गृह सचिव, खुफिया ब्यूरो के निदेशक, मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक सहित कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे।


आतंकवाद के खिलाफ सरकार की प्रतिबद्धता

अमित शाह ने सुरक्षा एजेंसियों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार जम्मू-कश्मीर में स्थायी शांति स्थापित करने और आतंकवाद को समाप्त करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। उन्होंने यह भी कहा कि आतंकवाद के प्रति सरकार की नीति में कोई नरमी नहीं आएगी, जिसके कारण पिछले वर्षों में आतंकवादी तंत्र को काफी कमजोर किया गया है।


बैठक में चर्चा के प्रमुख बिंदु

बैठक के बाद जारी सरकारी बयान में कहा गया कि सीमा पार से होने वाली साजिशों, आतंकी नेटवर्क, ओवर ग्राउंड वर्करों और हवाला के माध्यम से होने वाले वित्तपोषण पर विस्तार से चर्चा की गई। केंद्रीय गृह मंत्री ने स्पष्ट किया कि आतंकवादी ढांचे पर प्रहार करने के साथ-साथ उसके वित्तीय स्रोतों को बंद करना अत्यंत महत्वपूर्ण है।


आतंकवाद का जटिल तंत्र

आतंकवाद केवल एक घटना नहीं है, बल्कि यह एक संपूर्ण उद्योग है जिसमें हथियार, धन, प्रचार और डर का संगठित तंत्र शामिल होता है। यदि इस तंत्र की एक कड़ी भी बची रह जाती है, तो समस्या फिर से उभर सकती है। इसलिए अमित शाह का ध्यान केवल बंदूक पर नहीं, बल्कि वित्तीय स्रोतों और नेटवर्क पर भी है।


सामाजिक सहयोग की आवश्यकता

आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई केवल सुरक्षाबलों द्वारा नहीं जीती जा सकती, बल्कि समाज के सहयोग से भी इसे जीतना होगा। जब वित्तपोषण के स्रोत समाप्त होते हैं और ओवर ग्राउंड नेटवर्क टूटते हैं, तब आम लोग भी आतंक के खिलाफ खड़े होते हैं। सरकार को यह समझना होगा कि कड़े कदमों के साथ-साथ पारदर्शिता और संवेदनशीलता भी आवश्यक हैं ताकि निर्दोष लोगों का विश्वास बना रहे।


स्पष्ट नीति की आवश्यकता

अमित शाह की सख्त भाषा समय की मांग है। वर्षों तक आतंकवाद को राजनीतिक दृष्टिकोण से देखा गया, जिसके परिणामस्वरूप समस्या जटिल होती गई। अब स्पष्ट नीति की आवश्यकता है, जिसमें यह संदेश हो कि हिंसा का रास्ता चुनने वालों के लिए कोई स्थान नहीं है। जम्मू-कश्मीर में स्थायी शांति तभी आएगी जब आतंक का अंतिम ढांचा समाप्त होगा और उसके पीछे का वित्तीय जाल पूरी तरह नष्ट होगा।