अभी तक अनियंत्रित बीमारियों का सामना: जानें क्यों नहीं है इनका इलाज

चिकित्सा विज्ञान ने कई बीमारियों का इलाज खोज लिया है, लेकिन कुछ बीमारियां आज भी अनियंत्रित हैं। जानें पार्किंसंस, एचआईवी, और डायबिटीज जैसी बीमारियों के बारे में, जिनका इलाज संभव नहीं है। विशेषज्ञ डॉ. सुभाष गिरि से जानें कि कैसे इन बीमारियों को नियंत्रित किया जा सकता है और क्या बचाव के उपाय हैं।
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चिकित्सा विज्ञान में प्रगति के बावजूद कुछ बीमारियों का इलाज नहीं

चिकित्सा विज्ञान ने कई क्षेत्रों में अद्भुत प्रगति की है, जैसे कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रोबोटिक सर्जरी। फिर भी, कुछ बीमारियां ऐसी हैं जिनका पूर्ण इलाज संभव नहीं है। ये बीमारियां एक बार होने पर हमेशा के लिए बनी रहती हैं, और केवल इन्हें नियंत्रित किया जा सकता है। आइए जानते हैं कि ये कौन सी बीमारियां हैं और इनके इलाज में बाधाएं क्या हैं। इसके लिए हमने दिल्ली के आरएमएल हॉस्पिटल के मेडिसिन विभाग के निदेशक प्रोफेसर डॉ. सुभाष गिरि से बातचीत की।


पार्किंसंस रोग

डॉ. सुभाष के अनुसार, पार्किंसंस एक ऐसी बीमारी है जिसमें मरीज का नर्वस सिस्टम सही तरीके से कार्य नहीं करता। यह बीमारी आमतौर पर वृद्धावस्था में होती है और इससे चलने-फिरने और बोलने में कठिनाई हो सकती है। हालांकि, दवाओं और फिजियोथेरेपी से लक्षणों को नियंत्रित किया जा सकता है, लेकिन इसका कोई स्थायी इलाज नहीं है।


एचआईवी/एड्स

एचआईवी एक वायरस है जो एड्स का कारण बनता है। यह शरीर के इम्यून सिस्टम को कमजोर करता है। एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी (ART) के माध्यम से एचआईवी के मरीज सामान्य जीवन जी सकते हैं, लेकिन एड्स का कोई इलाज नहीं है।


टाइप 1 और 2 डायबिटीज

टाइप 1 डायबिटीज एक ऑटोइम्यून बीमारी है जिसमें शरीर इंसुलिन बनाना बंद कर देता है। मरीज को जीवनभर इंसुलिन की आवश्यकता होती है। टाइप 2 डायबिटीज का भी कोई स्थायी इलाज नहीं है, इसे केवल नियंत्रित किया जा सकता है।


ऑटोइम्यून बीमारियां

ऑटोइम्यून बीमारियों में शरीर का इम्यून सिस्टम अपनी ही स्वस्थ कोशिकाओं पर हमला करता है। इनका कोई इलाज नहीं है, केवल इन्हें नियंत्रित किया जा सकता है।


मल्टीपल स्क्लेरोसिस

यह एक ऐसी बीमारी है जिसमें इम्यून सिस्टम नसों को नुकसान पहुंचाता है। इसका कोई स्थायी इलाज नहीं है, लेकिन दवाओं से इसके प्रभाव को कम किया जा सकता है।


बीमारियों से बचाव के उपाय

इन बीमारियों को पूरी तरह से रोका नहीं जा सकता, लेकिन स्वस्थ जीवनशैली, नियमित जांच और डॉक्टर की सलाह से जोखिम को कम किया जा सकता है। समय पर लक्षणों की पहचान करना और जांच कराना आवश्यक है ताकि बीमारियों से बचाव किया जा सके।