अभिषेक बनर्जी को हाई कोर्ट से मिली राहत, जाली हस्ताक्षर मामले में सुरक्षा बढ़ाई गई

तृणमूल कांग्रेस के नेता अभिषेक बनर्जी को कलकत्ता हाई कोर्ट से जाली हस्ताक्षर मामले में राहत मिली है। कोर्ट ने उनकी सुरक्षा को एक महीने के लिए बढ़ा दिया है, जिससे उन्हें गिरफ्तारी से सुरक्षा मिलेगी। इस मामले में CID जांच कर रही है, जिसमें आरोप है कि विधानसभा में विपक्ष के नेता की नियुक्ति के लिए विधायकों के हस्ताक्षर जाली किए गए थे। जानें इस मामले की पूरी जानकारी और बनर्जी की स्थिति के बारे में।
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अभिषेक बनर्जी को मिली सुरक्षा

तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और डायमंड हार्बर के सांसद अभिषेक बनर्जी को कलकत्ता हाई कोर्ट से एक महत्वपूर्ण राहत मिली है। कोर्ट ने उन्हें गिरफ्तारी और अन्य कठोर कार्रवाई से सुरक्षा प्रदान करने वाले आदेश को एक महीने के लिए बढ़ा दिया है। जस्टिस कौशिक चंदा ने पहले से दी गई अंतरिम सुरक्षा को बनाए रखा और निर्देश दिया कि इस मामले की सुनवाई अगले सप्ताह फिर से की जाए। इस निर्णय से बनर्जी को सुरक्षा मिलती रहेगी, जबकि CID उन आरोपों की जांच जारी रखेगी, जिसमें कहा गया है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता की नियुक्ति के लिए जमा किए गए दस्तावेजों पर पार्टी विधायकों के जाली हस्ताक्षर किए गए थे।


विधायकों के जाली हस्ताक्षर का मामला

यह मामला उन आरोपों से संबंधित है, जिसमें कहा गया है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में पार्टी की हार के बाद, विपक्ष के महत्वपूर्ण पदाधिकारियों की नियुक्ति के लिए विधानसभा स्पीकर रथिंद्र बोस को सौंपे गए प्रस्ताव पर कई तृणमूल कांग्रेस विधायकों के हस्ताक्षर जाली तरीके से किए गए थे। इस प्रस्ताव में शोभनदेब चट्टोपाध्याय को विपक्ष का नेता, असीमा पात्रा और नैना बंद्योपाध्याय को उप-नेता और फिरहाद हकीम को मुख्य व्हिप बनाने का सुझाव दिया गया था। विवाद तब उत्पन्न हुआ जब TMC से निकाले गए विधायकों रिताब्रता बनर्जी और संदीपन साहा ने आरोप लगाया कि प्रस्ताव को मंज़ूरी देने के लिए 6 मई को विधायकों की कोई बैठक नहीं हुई थी।


CID की जांच

CID ने धोखाधड़ी, जालसाज़ी और आपराधिक साज़िश के आरोपों की जांच अपने हाथ में ले ली है। जांचकर्ताओं ने मूल प्रस्ताव पुस्तिका और अटेंडेंस रजिस्टर के लिए TMC कार्यालयों की तलाशी ली और विवादित दस्तावेज़ों तथा विधानसभा अध्यक्ष को उनके सौंपे जाने के बारे में अभिषेक बनर्जी से पूछताछ की। यह जांच TMC की चुनावी हार और उसके बाद हुई अंदरूनी बगावत के बीच चल रही है।