अभिषेक बनर्जी की लोकसभा स्पीकर से महत्वपूर्ण मुलाकात, टीएमसी के बागी सांसदों का मामला

तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने दिल्ली में लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से महत्वपूर्ण मुलाकात की। इस बैठक का उद्देश्य टीएमसी के 20 बागी सांसदों के त्रिपुरा स्थित NDA सहयोगी दल में विलय की घोषणा के संदर्भ में चर्चा करना है। अभिषेक ने स्पीकर को पत्र सौंपकर अनुरोध किया है कि उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाए। सुप्रीम कोर्ट में भी पार्टी नेताओं के दूसरी पार्टियों में जाने पर रोक लगाने की याचिका पर सुनवाई हुई। जानें इस राजनीतिक घटनाक्रम के सभी पहलू।
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अभिषेक बनर्जी की दिल्ली में बैठक

तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी ने दिल्ली में अपने निवास पर पहुंचकर बैठक की तैयारी की। उनके साथ पार्टी के अन्य सांसद, डेरेक ओ'ब्रायन और सौगत रॉय भी मौजूद हैं। आज शाम 5 बजे, अभिषेक बनर्जी की लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात निर्धारित है। यह मुलाकात टीएमसी के 20 बागी सांसदों के त्रिपुरा स्थित NDA सहयोगी दल, 'नेशनलिस्ट सिटिज़न्स पार्टी ऑफ इंडिया' (NCPI) में विलय की घोषणा के संदर्भ में हो रही है।


टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी ने स्पीकर को एक पत्र सौंपा है, जिसमें अनुरोध किया गया है कि इस मामले पर निर्णय लेने से पहले तृणमूल कांग्रेस को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाए। सौगत रॉय ने कहा कि एक समूह तथ्यों को छिपाने का प्रयास कर रहा है।


स्पीकर ने शाम 5 बजे अपने कार्यालय में बैठक बुलाई है, जिसमें अभिषेक बनर्जी शामिल होंगे। मैं भी उनके साथ बैठक में जाऊंगा। हमें उम्मीद है कि स्पीकर असली और वैध टीएमसी को मान्यता देंगे और किसी भी अलग हुए समूह को मान्यता नहीं देंगे।


सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक याचिका पर सुनवाई की, जिसमें पार्टी नेताओं को दूसरी राजनीतिक पार्टियों में जाने से रोकने के लिए निर्देश देने की मांग की गई थी। याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील सीआर जया सुकिन ने कहा कि देश में पार्टी नेता या तो रिश्वत लेकर भ्रष्टाचार में लिप्त हैं या धमकी दे रहे हैं कि यदि वे पार्टी में शामिल नहीं हुए तो उनके परिवार को नुकसान होगा।


सीजेआई सूर्यकांत ने वकील से पूछा कि वह किस सत्ताधारी पार्टी की बात कर रहे हैं। आपके राज्य में पार्टियां बदलती रहती हैं।


सुकिन ने कहा कि पूर्वी और मध्य भारत के एक-एक राज्य में पार्टी नेता दूसरी पार्टियों में शामिल हो रहे हैं। स्पीकर को नेताओं के इस्तीफे की जांच करनी चाहिए। स्पीकर मीडिया को बुलाते हैं, पत्र लेते हैं और कुछ ही मिनटों में नेता दूसरी पार्टी में शामिल हो जाते हैं। यह लोकतंत्र को कमजोर कर रहा है। याचिका खारिज की जाती है। यह याचिका बिना किसी ठोस सबूत के, अस्पष्ट और हल्के आरोपों पर आधारित है।