अबू सलेम की समय से पहले रिहाई की याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की
सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला
1993 के मुंबई सीरियल ब्लास्ट मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे अबू सलेम को सुप्रीम कोर्ट से एक बड़ा झटका लगा है। सर्वोच्च न्यायालय ने उसकी समय से पहले रिहाई की याचिका को खारिज कर दिया है। सलेम ने यह दावा किया था कि उसे जेल में मिली छूट और मुकदमे के दौरान बिताए गए समय को उसकी 25 साल की सजा में शामिल किया जाना चाहिए, ताकि वह जल्दी रिहा हो सके।
सजा की गणना पर विवाद
अबू सलेम ने अपनी दलील में कहा कि भारत और पुर्तगाल के बीच उसके प्रत्यर्पण के समय दी गई शर्तों के आधार पर, 25 साल की अधिकतम अवधि की गणना में जेल में मिली रिमिशन और अंडरट्रायल के दौरान बिताए गए समय को भी जोड़ा जाना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट का निर्णय
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया और उसकी समय से पहले रिहाई की मांग को खारिज कर दिया। इससे सलेम की जेल से बाहर आने की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है।
पिछले कानूनी प्रयास
अबू सलेम की रिहाई से संबंधित मामला पहले भी अदालतों में पहुंच चुका है। फरवरी 2026 में, सुप्रीम कोर्ट ने उसकी एक याचिका खारिज करते हुए उसे उच्च न्यायालय जाने की अनुमति दी थी। इसके बाद कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ी।
1993 मुंबई ब्लास्ट केस में सजा
अबू सलेम को 1993 के मुंबई सीरियल ब्लास्ट मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। उसे भारत लाए जाने के बाद इस मामले में कानूनी कार्रवाई की गई और अदालत ने उसे दोषी ठहराया।
आगे की प्रक्रिया
सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले के बाद, अबू सलेम की समय से पहले रिहाई की उम्मीदें फिलहाल समाप्त हो गई हैं। अदालत ने उसकी 25 साल की अवधि पूरी होने के आधार पर की गई रिहाई की मांग को खारिज कर दिया है।
