अप्रैल में रिटेल महंगाई में मामूली वृद्धि, खाद्य कीमतों में बढ़ोतरी का असर

अप्रैल 2026 में रिटेल महंगाई में 0.08 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जो खाद्य पदार्थों की कीमतों में इजाफे के कारण है। यह लगातार छठा महीना है जब महंगाई में वृद्धि देखी गई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, रिटेल महंगाई 3.48 प्रतिशत पर पहुंच गई है। खाद्य महंगाई में भी तेजी आई है, जिसमें ग्रामीण क्षेत्रों में शहरी क्षेत्रों की तुलना में अधिक वृद्धि हुई है। जानें इस विषय पर विस्तृत जानकारी।
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महंगाई में वृद्धि का संक्षिप्त विश्लेषण

खाद्य पदार्थों की कीमतों में वृद्धि के कारण अप्रैल में रिटेल महंगाई में हल्की बढ़ोतरी हुई है। इस महीने महंगाई दर में 0.08 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। यह ध्यान देने योग्य है कि अक्टूबर के बाद से महंगाई में लगातार वृद्धि देखी जा रही है, जो अब तक छह महीनों तक जारी रही है। हालांकि, महंगाई के ये आंकड़े अभी भी भारतीय रिजर्व बैंक के 4 प्रतिशत के टॉलरेंस स्तर से नीचे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मध्य पूर्व में संकट लंबे समय तक बना रहता है, तो आने वाले समय में महंगाई में भारी वृद्धि हो सकती है।


अप्रैल में महंगाई की दर

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल में देश में रिटेल महंगाई 3.48 प्रतिशत पर पहुंच गई है, जबकि मार्च में यह 3.40 प्रतिशत थी। अक्टूबर 2025 में यह दर 0.25 प्रतिशत थी, जिसके बाद से इसमें लगातार वृद्धि हो रही है। नवंबर में यह 0.71 प्रतिशत, दिसंबर में 1.33 प्रतिशत, जनवरी में 2.74 प्रतिशत और फरवरी में 3.21 प्रतिशत पर पहुंच गई। इसका मतलब है कि पिछले तीन महीनों से रिटेल महंगाई का आंकड़ा 3 प्रतिशत से अधिक बना हुआ है।


खाद्य महंगाई में वृद्धि

रिटेल महंगाई में वृद्धि का मुख्य कारण खाद्य महंगाई है, जिसमें अच्छी तेजी देखी गई है। अप्रैल 2025 की तुलना में अप्रैल 2026 के लिए अखिल भारतीय उपभोक्ता खाद्य मूल्य सूचकांक पर आधारित साल-दर-साल महंगाई दर 4.20 प्रतिशत है। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के लिए महंगाई दर क्रमशः 4.26 प्रतिशत और 4.10 प्रतिशत है, जो दर्शाता है कि गांवों में खाद्य महंगाई शहरों की तुलना में अधिक बढ़ी है। मार्च में खाद्य महंगाई 3.87 प्रतिशत पर थी।