अधिक पूर्णिमा: भगवान विष्णु से जुड़ी विशेष तिथि और इसके लाभ

अधिक पूर्णिमा, जो इस वर्ष 31 मई को मनाई जाएगी, हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण तिथि है। इसे भगवान विष्णु से जोड़ा जाता है और इसे 'सर्व सिद्धिदायिनी पूर्णिमा' कहा जाता है। इस दिन विशेष पूजा-अर्चना करने से भक्तों को अनेक लाभ मिलते हैं। जानें इस दिन के महत्व, भगवान विष्णु के साथ इसके संबंध और इसके द्वारा मिलने वाले पुण्य के बारे में।
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अधिक पूर्णिमा: भगवान विष्णु से जुड़ी विशेष तिथि और इसके लाभ gyanhigyan

अधिक पूर्णिमा का महत्व

अधिक पूर्णिमा: भगवान विष्णु से जुड़ी विशेष तिथि और इसके लाभ
क्यों कहलाती है Adhik Purnima 'सर्व सिद्धिदायिनी'? जानें Lord Vishnu से इसका Special Connection


हिंदू धर्म में पूर्णिमा का एक विशेष स्थान है। अधिक मास में आने वाली पूर्णिमा को 'अधिक पूर्णिमा' कहा जाता है। इस पूर्णिमा का महत्व इसलिए है क्योंकि अधिक मास हर तीन साल में एक बार आता है। इस वर्ष ज्येष्ठ का महीना अधिक मास है, जिसकी शुरुआत 17 मई को हुई और यह 15 जून तक चलेगा। इस बार अधिक पूर्णिमा 31 मई 2026, रविवार को मनाई जाएगी। इसे सामान्य पूर्णिमा से अधिक शक्तिशाली और फलदायी माना जाता है।


अधिक पूर्णिमा की परिभाषा

हिंदू कैलेंडर के अनुसार, सौर और चंद्र वर्ष के बीच 11 दिनों का अंतर होता है। इसे संतुलित रखने के लिए हर तीसरे वर्ष एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है, जिसे अधिक मास, मलमास या पुरुषोत्तम मास कहा जाता है। इस महीने में आने वाली पूर्णिमा को अधिक पूर्णिमा कहा जाता है।


भगवान विष्णु का संबंध

धार्मिक ग्रंथों में भगवान विष्णु को पुरुषोत्तम कहा गया है, जिसका अर्थ है सभी पुरुषों में श्रेष्ठ। अधिक मास भगवान विष्णु को समर्पित होता है, इसलिए इसे पुरुषोत्तम मास कहा जाता है। जब पूर्णिमा इस पवित्र माह में आती है, तो इसका महत्व और बढ़ जाता है। श्रद्धा से की गई पूजा से भक्तों को श्रीहरि विष्णु की कृपा और माता लक्ष्मी का आशीर्वाद मिलता है।


सर्व सिद्धिदायिनी पूर्णिमा का महत्व

धार्मिक ग्रंथों जैसे स्कन्दपुराण, पद्मपुराण, नारदपुराण और भविष्यपुराण में अधिक मास की पूर्णिमा को 'सर्व सिद्धिदायिनी पूर्णिमा' कहा गया है। इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है, जो जीवन के सभी कष्टों को दूर करती है और सिद्धियों के द्वार खोलती है।


अधिक पूर्णिमा के लाभ

– धार्मिक पुराणों के अनुसार, इस दिन दान, जप, व्रत और कथा श्रवण करने से 100 यज्ञों के समान पुण्य फल प्राप्त होता है।


– भगवान विष्णु की आराधना से सभी पापों का शमन किया जा सकता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।


– इस दिन किए गए सभी कार्यों का फल कभी नष्ट नहीं होता, इसलिए इसे अक्षय पुण्य करने की तिथि माना जाता है।