अडाणी ग्रुप को मिली राहत, विदेशी निवेश में वृद्धि की उम्मीद

ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म बर्नस्टीन ने अडाणी ग्रुप के विवादों के कम होने और अमेरिकी नियामकीय जांच में राहत मिलने के बाद विदेशी निवेश में वृद्धि की संभावना जताई है। रिपोर्ट में ग्रुप की चार प्रमुख कंपनियों का विश्लेषण किया गया है। पिछले चार वर्षों में ग्रुप ने दो बड़े झटके झेले हैं, लेकिन अब निवेशकों का विश्वास लौटता नजर आ रहा है। अडाणी ग्रुप की ताकत बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को तेजी से पूरा करने की क्षमता है, और फंडिंग सोर्स में भी विविधता आई है। जानें इस रिपोर्ट में और क्या कहा गया है।
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अडाणी ग्रुप को मिली राहत, विदेशी निवेश में वृद्धि की उम्मीद gyanhigyan

अडाणी ग्रुप पर लगे विवादों का असर कम हुआ

ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म बर्नस्टीन ने हाल ही में बताया कि अडाणी ग्रुप से जुड़े विवाद और अमेरिकी नियामकीय जांच का खतरा अब काफी हद तक समाप्त हो चुका है। इससे ग्रुप में विदेशी निवेश और निवेशकों की भागीदारी में वृद्धि की संभावना बढ़ गई है। बर्नस्टीन ने अपनी रिपोर्ट में ग्रुप की चार प्रमुख लिस्टेड कंपनियों - अडाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन, अडाणी ग्रीन एनर्जी, अडाणी पावर और अंबुजा सीमेंट का विश्लेषण किया है। रिपोर्ट के अनुसार, 2023 में सामने आए शॉर्ट-सेलर विवाद और अमेरिका में शुरू हुई जांच के कारण कई विदेशी निवेशकों ने अडाणी ग्रुप से दूरी बना ली थी। लेकिन अब अमेरिकी मामलों में राहत मिलने के बाद निवेशकों का विश्वास लौटता नजर आ रहा है.


अडाणी ग्रुप को मिले दो बड़े झटके

बर्नस्टीन ने कहा कि अमेरिकी प्रतिभूति एवं विनिमय आयोग (SEC) से जुड़े मामले के समाधान और अमेरिकी अभियोजकों द्वारा ग्रुप के खिलाफ आरोप हटाने की प्रक्रिया ने ग्रुप के शेयरों पर बने दबाव को कम कर दिया है। हालांकि, कई शेयर अभी भी संकट से पहले के स्तर तक नहीं पहुंच पाए हैं। रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि पिछले चार वर्षों में ग्रुप ने दो बड़े झटके झेले हैं। पहला, जनवरी 2023 में अमेरिकी शॉर्ट-सेलिंग कंपनी हिंडनबर्ग रिसर्च की रिपोर्ट और दूसरा, नवंबर 2024 में शुरू हुई अमेरिकी SEC और न्याय विभाग की जांच.


हिंडनबर्ग रिसर्च के आरोप

हिंडनबर्ग रिसर्च ने अडाणी ग्रुप पर शेयरों में हेरफेर, टैक्स हेवन के दुरुपयोग और अकाउंटिंग में गड़बड़ी जैसे गंभीर आरोप लगाए थे। इन आरोपों के चलते ग्रुप की कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट आई और मार्केट कैप में अरबों डॉलर की कमी आई। हालांकि, अडाणी ग्रुप ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए उन्हें दुर्भावनापूर्ण बताया। इसी बीच, भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि ज्यादातर जांच पूरी हो चुकी है और ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला है, जिससे व्यापक बाजार हस्तक्षेप की आवश्यकता हो। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि अब हिंडनबर्ग रिसर्च ने अपना परिचालन बंद कर दिया है.


अडाणी ग्रुप की ताकत

बर्नस्टीन के अनुसार, अडाणी ग्रुप की सबसे बड़ी ताकत बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को तेजी से पूरा करने की क्षमता है। पोर्ट, लॉजिस्टिक्स, थर्मल पावर और रिन्यूएबल एनर्जी जैसे क्षेत्रों में ग्रुप लगातार अपनी हिस्सेदारी बढ़ा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, देश के कंटेनर पोर्ट बाजार में अडाणी ग्रुप की हिस्सेदारी अब लगभग 50 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। हालांकि, रिपोर्ट में यह भी स्वीकार किया गया कि सितंबर 2024 के बाद तेज पूंजीगत निवेश के कारण ग्रुप का कुल शुद्ध कर्ज लगभग 1,00,000 करोड़ रुपये बढ़ गया है। इसके बावजूद आय में मजबूत वृद्धि जारी है और वित्त वर्ष 2022-23 से 2025-26 के बीच ग्रुप की कर पूर्व आय (EBITDA) में सालाना 22 प्रतिशत की दर से बढ़ोतरी हुई है.


फंडिंग सोर्स में विविधता

ब्रोकरेज का कहना है कि अडाणी ग्रुप के फंडिंग सोर्स में भी विविधता आई है। घरेलू बैंकों पर निर्भरता घटाते हुए ग्रुप ने बॉंड वित्त को बढ़ावा दिया है। हालिया अमेरिकी घटनाक्रम के बाद डॉलर कोष तक पहुंच और बेहतर हो सकती है। रिपोर्ट में यह निष्कर्ष निकाला गया कि विवादों और जांचों के बावजूद अडाणी ग्रुप की परियोजनाओं को लागू करने की क्षमता और बुनियादी ढांचा क्षेत्र में उसकी मजबूत मौजूदगी उसे भारत की विकास कहानी का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाए हुए है.