अग्निवीरों को मिलेगी दो साल की अतिरिक्त सेवा का विकल्प, सीडीएस की घोषणा संभव
अग्निपथ योजना के तहत अग्निवीरों के लिए नया विकल्प
नई दिल्ली। केंद्र सरकार अग्निपथ योजना के अंतर्गत भारतीय सशस्त्र बलों में भर्ती हुए अग्निवीरों को दो साल की अतिरिक्त सेवा का विकल्प देने की योजना बना रही है। इस संबंध में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल एनएस राजा सुब्रमणि जल्द ही एक आधिकारिक घोषणा कर सकते हैं। सरकारी अधिकारियों के अनुसार, यह निर्णय अग्निवीरों के योगदान को मान्यता देने और उनकी सेवाओं को जारी रखने की आवश्यकता को दर्शाता है। हालांकि, यह विकल्प पूरी तरह से संबंधित अग्निवीर की इच्छा पर निर्भर करेगा।
यह निर्णय तब आया है जब अग्निपथ योजना के तहत भर्ती हुए पहले बैच के अग्निवीरों की चार साल की सेवा अवधि समाप्त होने वाली है। तीनों सेनाओं ने नवंबर के मध्य से पहले बैच के लगभग 75 प्रतिशत अग्निवीरों को चरणबद्ध तरीके से सेवा से मुक्त करने की प्रक्रिया शुरू करने की योजना बनाई थी। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 31 दिसंबर तक 18,300 से अधिक अग्निवीर अपने चार साल के कार्यकाल के बाद सशस्त्र बलों से बाहर होने वाले थे। इस संदर्भ में दो साल के सेवा विस्तार का प्रस्ताव पहले बैच के कई जवानों के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अग्निपथ योजना की शुरुआत 2022 में हुई थी, जिसका उद्देश्य सशस्त्र बलों को युवा बनाए रखना और उनकी युद्धक क्षमता को बनाए रखना है। हालांकि, इस योजना को लागू करने के बाद से राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस होती रही है। इसका मुख्य कारण यह है कि इसके तहत अधिकारी रैंक से नीचे के सैन्य कर्मियों की नियमित सेवा अवधि कम कर दी गई है और उन्हें पहले की भर्ती व्यवस्था की तुलना में सीमित सेवा लाभ मिलते हैं।
इस योजना के तहत, युवाओं को सशस्त्र बलों में चार साल के लिए अग्निवीर के रूप में भर्ती किया जाता है। इस अवधि के बाद, कुल भर्ती अग्निवीरों में से अधिकतम 25 प्रतिशत को नियमित सैन्य सेवा में बनाए रखने का प्रावधान है। चयनित अग्निवीर इसके बाद 15 साल तक नियमित सेवा कर सकते हैं, जबकि शेष 75 प्रतिशत अग्निवीरों को चार साल का कार्यकाल पूरा होने पर सेवा से मुक्त किया जाता है। प्रस्तावित दो साल के अतिरिक्त सेवा विकल्प से इस व्यवस्था में एक नया पहलू जुड़ सकता है।
इस वर्ष सेवा से बाहर होने वाले लगभग 18,300 अग्निवीर पहले चरण में सेना, वायुसेना और नौसेना में भर्ती किए गए कुल 24,400 जवानों में से करीब 75 प्रतिशत हैं। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पहले बैच में भारतीय थलसेना में लगभग 19,000, भारतीय वायुसेना में 2,850 और भारतीय नौसेना में करीब 2,550 अग्निवीर शामिल थे। इन जवानों के चार साल का कार्यकाल पूरा होने के बाद अब उनके सामने सेवा जारी रखने या सैन्य सेवा से बाहर होने का विकल्प होगा।
तीनों सेनाओं ने अग्निवीरों के प्रदर्शन पर संतोष व्यक्त किया है। सरकारी अधिकारियों के अनुसार, उनकी भूमिका और योगदान को देखते हुए भविष्य में भर्ती व्यवस्था में बदलाव की संभावनाओं पर भी विचार किया जा सकता है। इससे पहले भी संकेत दिए गए थे कि विशेष तकनीकी और पेशेवर कौशल रखने वाले अग्निवीरों को अधिक संख्या में सैन्य सेवा में बनाए रखने के लिए योजना में संशोधन किया जा सकता है।
वर्तमान में भारतीय थलसेना में लगभग 2.70 लाख अग्निवीर, भारतीय वायुसेना में करीब 27 हजार और भारतीय नौसेना में लगभग 21 हजार अग्निवीर विभिन्न जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे हैं। तीनों सेनाओं में उनकी तैनाती और कार्यक्षेत्र के अनुभव के आधार पर भविष्य की भर्ती और सेवा संबंधी नीतियों में बदलाव पर विचार किया जा रहा है। विशेष कौशल वाले जवानों को लंबे समय तक सैन्य सेवाओं में बनाए रखने की संभावना भी इसी व्यापक प्रक्रिया का हिस्सा मानी जा रही है।
अग्निपथ योजना भारतीय सशस्त्र बलों की दशकों पुरानी भर्ती व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण बदलाव है। केंद्र सरकार ने जून 2022 में इस नई योजना की घोषणा की थी, जिसमें चार साल के निर्धारित कार्यकाल वाली व्यवस्था लागू की गई थी। इसके तहत युवाओं को अग्निवीर के रूप में सेना में शामिल किया जाने लगा। योजना का उद्देश्य सैन्य बलों की आयु संरचना को युवा बनाना और भविष्य की सैन्य जरूरतों के अनुरूप भर्ती प्रक्रिया तैयार करना है।
अब पहले बैच के अग्निवीरों की सेवा अवधि समाप्त होने के करीब होने और दो साल के अतिरिक्त सेवा विकल्प की तैयारी ने अग्निपथ योजना को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज कर दी है। यदि इस प्रस्ताव की आधिकारिक घोषणा होती है, तो इससे उन अग्निवीरों को अपनी सैन्य सेवाएं आगे जारी रखने का अवसर मिल सकेगा, जो चार साल का कार्यकाल पूरा करने के बाद भी सशस्त्र बलों में काम करना चाहते हैं। हालांकि, इस संबंध में अंतिम निर्णय और अतिरिक्त सेवा की शर्तें आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगी।
