अखिलेश यादव ने लोकसभा में पेपर लीक पर केंद्र सरकार को घेरा

लोकसभा में पेपर लीक के खिलाफ़ संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला किया। उन्होंने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उल्लेख करते हुए कहा कि एक 'प्रधान' को बचाने के लिए दूसरे 'प्रधान' को हटाया गया है। यादव ने NEET उम्मीदवारों की आत्महत्या पर भी चिंता जताई और कहा कि उत्तर प्रदेश में भाजपा के शासन में 20 बार परीक्षा के पेपर लीक हुए हैं। उन्होंने सरकार की नीयत पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह केवल दिखावे का विधेयक है।
 | 
gyanhigyan

लोकसभा में पेपर लीक पर बहस

लोकसभा में पेपर लीक के खिलाफ़ संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला किया। उन्होंने कहा कि एक 'प्रधान' को बचाने के लिए दूसरे 'प्रधान' को हटाया गया है। इस संदर्भ में उन्होंने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उल्लेख किया। यादव ने कहा कि जब मंत्री (पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान) संसद पहुंचे, तो सदन के बाहर उनका स्वागत किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि सदस्यों को कितनी राहत मिली होगी और किस संकट से वे बच गए। एक 'प्रधान' को हटाकर, वास्तव में 'प्रधानमंत्री' को सुरक्षित किया गया है। 


 


अखिलेश यादव ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी के कार्यों की कड़ी आलोचना की और सवाल उठाया कि देश की प्रमुख शैक्षणिक संस्थाओं का काम आउटसोर्स क्यों किया गया। उन्होंने लोकसभा में उन NEET उम्मीदवारों को श्रद्धांजलि दी, जिन्होंने आत्महत्या की। यादव का कहना है कि उत्तर प्रदेश में भाजपा के शासन में 10 वर्षों में 20 बार परीक्षा के पेपर लीक हुए। उन्होंने पार्टी की एक विशेष पुस्तिका से परीक्षा पेपर लीक की घटनाओं की सूची भी पढ़कर सुनाई।


 


मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि समस्या कानूनों की नहीं, बल्कि नीयत की है। उन्होंने कहा कि उन्होंने दूर से ही विरोध-प्रदर्शन देखे और जीत के बाद जो नारे लगाए गए, वे सरकार के खिलाफ थे। कांग्रेस नेता गौरव गोगोई ने लोकसभा में परीक्षा प्रश्नपत्र निरोधक कानून को मोदी सरकार की ‘विफलता का स्मारक’ बताया और गृह मंत्री अमित शाह से सवाल किया कि प्रदर्शनकारी छात्रों पर पैलेट गन का इस्तेमाल करने का आदेश किसने दिया। उन्होंने ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026’ पर चर्चा की शुरुआत करते हुए सरकार की मंशा पर सवाल उठाए और कहा कि 2024 में लाया गया मूल कानून भी पेपर लीक रोकने में असफल रहा था। 


 


उन्होंने कहा कि मंत्री (जितेंद्र सिंह) के वक्तव्य और विधेयक के प्रावधानों से स्पष्ट है कि सरकार शिक्षा व्यवस्था में सुधार को लेकर गंभीर नहीं है और यह केवल दिखावे का विधेयक है। उनके अनुसार, 2024 में जब इसी तरह का विधेयक लाया गया था, तब सरकार ने इसे ऐतिहासिक बताते हुए कहा था कि पेपर लीक नहीं होगा, लेकिन उसी वर्ष नीट-यूजी पेपर लीक मामले में 45 लोगों को आरोपी बनाया गया, जिनमें से अधिकांश को जमानत मिल चुकी है। उनका कहना था कि मामले के कथित मास्टरमाइंड को भी जमानत मिल गई।


 


देशभर की राजनीति, ताज़ा घटनाओं और बड़ी खबरों से जुड़े रहने के लिए पढ़ें  National News in Hindi केवल मीडिया चैनल पर।