अखिलेश यादव ने भाजपा पर बिजली संकट को लेकर कसा तंज
समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश में बिजली संकट को लेकर भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि सत्ताधारी पार्टी जनता के गुस्से से ध्यान भटकाने के लिए राजनीतिक चालें चल रही है। यादव ने भाजपा के विधायकों और सांसदों पर महा विद्युत संकट के चलते जनता के आक्रोश से बचने का आरोप लगाया। उन्होंने यह भी कहा कि इस संकट के कारण बुजुर्गों और बीमारों की स्थिति और खराब हो गई है। जानें उनके बयान में और क्या कहा गया है।
| May 25, 2026, 15:20 IST
बिजली संकट पर अखिलेश यादव का बयान
समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने सोमवार को उत्तर प्रदेश में बिजली संकट के मुद्दे पर भाजपा सरकार पर तीखा हमला किया। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ताधारी पार्टी राजनीतिक चालों और मंत्रिमंडल में बदलाव के जरिए जनता के बढ़ते गुस्से से ध्यान भटकाने का प्रयास कर रही है। यादव ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में भाजपा के विधायकों और सांसदों पर आरोप लगाया कि वे महा विद्युत संकट के चलते जनता के आक्रोश से खुद को बचाने की कोशिश कर रहे हैं। उनका कहना है कि सत्ताधारी पार्टी के नेता जनहित में नहीं, बल्कि आगामी चुनावों में अपने राजनीतिक भविष्य को सुरक्षित करने के लिए पत्र जारी कर रहे हैं।
अखिलेश ने कहा कि उत्तर प्रदेश में असहनीय 'महा विद्युत संकट' के कारण बढ़ते जन आक्रोश से बचने के लिए भाजपा के विधायक और सांसद एक दिखावटी पत्र का सहारा ले रहे हैं। उन्होंने इसे 'कागजी कवच' करार दिया और कहा कि यह पत्र वास्तव में उनकी सरकार को लिखा गया कोई 'जनहित पत्र' नहीं है, बल्कि यह आगामी चुनावों में भाजपा की डूबती नाव से निकलने के लिए विपक्ष को टिकट पाने का 'आवेदन पत्र' है।
समाजवादी पार्टी के प्रमुख ने यह भी कहा कि भीषण गर्मी में लंबे समय तक बिजली कटौती ने बुजुर्गों, बच्चों, महिलाओं और बीमारों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। उन्होंने सरकार पर जनता की शिकायतों को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया। यादव ने कहा कि हमारे गठबंधन में ऐसे नेताओं के लिए कोई स्थान नहीं है जो केवल जनता को कष्ट और कठिनाइयों का सामना कराते हैं। इस गर्मी में, घर पर बुजुर्गों, बीमारों और बच्चों का ध्यान रखने वाली महिलाओं की स्थिति को केवल परिवार के सदस्य ही सही मायने में समझ सकते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग आपदाओं में अवसर तलाशते थे, अब उन्हें यह समझ में आ गया है कि जिस 'अधिकारी' को वे निशाना बना रहे थे, वही अब स्वयं आपदा बन गया है। जब तक समस्याओं का समाधान करने वाले लोग सक्रिय नहीं होंगे, तब तक समस्याएँ बनी रहेंगी। उन्होंने भाजपा की दोहरे इंजन वाली सरकार के कामकाज पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि इस आंतरिक संघर्ष का खामियाजा जनता को क्यों भुगतना पड़े?
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