अखिलेश यादव ने भाजपा के वृक्षारोपण अभियान पर उठाए गंभीर सवाल

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार के वृक्षारोपण अभियान पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने इसे भ्रष्टाचार का एक साधन बताया और कहा कि भाजपा ने केवल कागजों पर पेड़ लगाए हैं। इसके अलावा, उन्होंने नदियों की सफाई के मुद्दे पर भी सरकार की विफलताओं को उजागर किया। जानें इस मुद्दे पर उनका पूरा बयान और भाजपा के खिलाफ उनके आरोप।
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भ्रष्टाचार के आरोपों के साथ वृक्षारोपण अभियान पर सवाल

समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने रविवार को भाजपा सरकार के वृक्षारोपण कार्यक्रम पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा के लिए ‘वृक्षारोपण’ वास्तव में ‘भ्रष्टारोपण’ का एक साधन बन गया है। उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उसी दिन ‘एक पेड़ मां के नाम’ महा अभियान की शुरुआत की, जिसमें राज्य में 35 करोड़ से अधिक पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है।




सपा मुख्यालय से जारी एक बयान में, अखिलेश यादव ने इस अभियान पर सवाल उठाते हुए कहा, “यह 35 करोड़ पेड़ लगाने का मामला नहीं है, बल्कि हर पेड़ से कम से कम 10 रुपये यानी कुल 350 करोड़ रुपये कमाने की भाजपा की गुप्त योजना है। जिन्होंने भगवान का दरबार नहीं छोड़ा, वे बाग-बगीचे क्या छोड़ेंगे।” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा सरकार में हर विभाग में लूट मची हुई है और योजनाएं केवल भ्रष्टाचार के लिए बनाई जाती हैं। उन्होंने कहा कि पिछले 10 वर्षों में सरकार ने केवल कागजों पर पेड़ लगाए हैं, जबकि जमीन पर कोई पेड़ नहीं दिखाई देता। जो कुछ पेड़ लगे भी हैं, वे पानी की कमी के कारण सूख गए हैं।


 


अखिलेश यादव ने आगे कहा कि सरकार हर साल वृक्षारोपण के नाम पर नई भ्रष्टाचार योजनाएं लाती है और बजट बांटने के बाद अभियान समाप्त हो जाता है। इसके बाद सालभर सरकार को न तो पेड़ों की चिंता होती है और न ही पर्यावरण की। उन्होंने आरोप लगाया कि इस सरकार में पेड़ों और जंगलों की अवैध कटाई हो रही है, जिससे पर्यावरण के लिए गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है।


 


नदियों की सफाई के मुद्दे पर बोलते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा सरकार ने नदियों को साफ करने का झूठा वादा किया और उसका बजट भी भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया। उन्होंने कहा कि न तो गंगा साफ हुई और न ही उसकी सहायक नदियां। यमुना नदी भी गंभीर प्रदूषण का सामना कर रही है और प्रदेश की अन्य नदियां अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रही हैं। उन्होंने याद दिलाया कि सपा सरकार के दौरान लखनऊ में गोमती नदी की सफाई करके विश्वस्तरीय गोमती रिवरफ्रंट बनाया गया था, जो नदियों की सफाई का एक बेहतरीन उदाहरण था, लेकिन भाजपा सरकार ने उसे भी बर्बाद कर दिया।