अंतरराष्ट्रीय योग दिवस: कोलकाता में ऐतिहासिक उत्सव का आयोजन

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2023 पर कोलकाता में ऐतिहासिक उत्सव का आयोजन होने जा रहा है, जिसमें लगभग 10 लाख लोग भाग लेंगे। इस वर्ष की थीम 'स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग' है, जो युवाओं के लिए स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता का एक बड़ा अवसर प्रस्तुत करती है। प्रधानमंत्री मोदी के प्रयासों से योग अब एक वैश्विक जन आंदोलन बन चुका है। जानें इस विशेष दिन के महत्व और योग के बढ़ते प्रभाव के बारे में।
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अंतरराष्ट्रीय योग दिवस: कोलकाता में ऐतिहासिक उत्सव का आयोजन gyanhigyan

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का उत्सव

इस वर्ष अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर देशभर में अभूतपूर्व उत्साह का माहौल है। पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में आयोजित मुख्य कार्यक्रम में भाग लेने के लिए लगभग 10 लाख लोग एकत्रित होंगे। यह पहली बार है जब कोलकाता में इस दिन का मुख्य आयोजन हो रहा है, जिससे शहर में विशेष उत्साह और उत्सव का वातावरण बना हुआ है। यह जोश दर्शाता है कि योग दिवस अब एक जन आंदोलन का रूप ले चुका है।


इस वर्ष की थीम

इस साल अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की थीम ‘स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग’ रखी गई है, जो वर्तमान समय में अत्यंत महत्वपूर्ण है। भारत दुनिया के सबसे युवा देशों में से एक है, और यह युवाओं के लिए स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता का एक बड़ा अवसर है। यदि लोग आज से योग और स्वास्थ्य पर ध्यान केंद्रित करें, तो वे भविष्य में बेहतर जीवन जीने के साथ-साथ देश के विकास में भी योगदान कर सकेंगे।


योग का बढ़ता महत्व

योग प्रशिक्षकों का मानना है कि योग अब केवल एक शारीरिक अभ्यास नहीं रह गया है, बल्कि यह एक जन उत्सव का रूप ले चुका है। लोगों में योग के प्रति बढ़ती जागरूकता इस बात का प्रमाण है कि यह परंपरा अब हर घर तक पहुंच रही है।


योग दिवस की शुरुआत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2014 में संयुक्त राष्ट्र महासभा में 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस घोषित करने का प्रस्ताव रखा था, जो मात्र तीन महीनों में 177 देशों के समर्थन से पारित हुआ। इसके बाद से 2015 से हर साल योग दिवस मनाया जा रहा है। मोदी ने हर वर्ष विभिन्न शहरों में योग दिवस कार्यक्रमों का नेतृत्व किया है।


योग दिवस के ऐतिहासिक आयोजन

2015 में नई दिल्ली के कर्तव्य पथ पर पहले कार्यक्रम में 35 हजार से अधिक लोगों ने भाग लिया और दो विश्व रिकॉर्ड बने। इसके बाद चंडीगढ़, लखनऊ, देहरादून, रांची, मैसूर, श्रीनगर और न्यूयॉर्क जैसे स्थानों पर भव्य आयोजन हुए। महामारी के दौरान 2020 और 2021 में योग दिवस डिजिटल माध्यम से मनाया गया, जिसमें ‘घर पर योग’ और ‘स्वास्थ्य के लिए योग’ जैसे संदेश दिए गए।


योग को वैश्विक पहचान

प्रधानमंत्री मोदी ने योग को एक वैश्विक जन आंदोलन बनाने के लिए कूटनीति, तकनीक और जन भागीदारी का प्रभावी उपयोग किया। उन्होंने योग को धार्मिक सीमाओं से ऊपर उठाकर स्वास्थ्य और मानव कल्याण से जोड़ा। आयुष मंत्रालय की स्थापना और विश्व स्वास्थ्य संगठन के सहयोग से बहुभाषी योग प्रशिक्षण मंच तैयार करने जैसे प्रयासों ने योग को विश्व स्तर पर नई पहचान दिलाई। आज योग दिवस 190 से अधिक देशों में मनाया जा रहा है और यह भारत की सांस्कृतिक पहचान का एक महत्वपूर्ण प्रतीक बन चुका है।