TMC में राजनीतिक उथल-पुथल: सांसदों के गुट का विलय का प्रयास
TMC में राजनीतिक हलचल
तृणमूल कांग्रेस (TMC) में हाल ही में राजनीतिक गतिविधियाँ तेज हो गई हैं, जब लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने संकेत दिया कि पार्टी से अलग हुए सांसदों के मामले में निर्णय सभी संबंधित पक्षों की सुनवाई के बाद ही लिया जाएगा। सूत्रों के अनुसार, स्पीकर के कार्यालय ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ जुड़े TMC सांसदों के समूह को पत्र भेजा है, जिसमें उन्हें किसी भी निर्णय से पहले बैठक में शामिल होने और अपना पक्ष रखने के लिए कहा गया है। यह घटनाक्रम तब सामने आया है जब TMC के लगभग 20 सांसदों के एक समूह ने स्पीकर से मुलाकात की और अपने समूह को मान्यता देने तथा उसे नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (NCP) में विलय करने का अनुरोध किया।
स्पीकर का निर्णय
उम्मीद की जा रही है कि स्पीकर मान्यता या विलय पर निर्णय लेने से पहले मूल पार्टी नेतृत्व और अलग हुए समूह दोनों की बात सुनकर उचित प्रक्रिया का पालन करेंगे। इसके साथ ही, इस मामले पर कानूनी सलाह भी ली जा सकती है। संसद के मॉनसून सत्र से पहले इस पर निर्णय होने की संभावना है, जो आमतौर पर जुलाई के तीसरे सप्ताह में शुरू होता है।
TMC में दरार की गहराई
इस घटनाक्रम ने TMC के भीतर पहले से बढ़ रही दरार को और बढ़ा दिया है। पश्चिम बंगाल विधानसभा में, 64 विधायकों के समर्थन से ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में एक समानांतर समूह उभरा है। खबरों के अनुसार, विधानसभा अध्यक्ष ने उन्हें विपक्ष के नेता के रूप में मान्यता दे दी है, जो राज्य इकाई में एक बड़े राजनीतिक बदलाव का संकेत है। लोकसभा में, 20 से अधिक सांसदों के अलग हुए समूह का नेतृत्व काकोली घोष दस्तीदार कर रही हैं; इन सांसदों ने अपने समूह के लिए औपचारिक मान्यता की मांग की है। इस बीच, पार्टी के वरिष्ठ नेता अभिषेक बनर्जी ने अध्यक्ष को पत्र लिखकर अनुरोध किया है कि इस समूह को मान्यता न दी जाए। इससे पहले, काकोली ने कहा था कि यह समूह BJP के नेतृत्व वाले NDA को अपना समर्थन देगा। राज्यसभा में भी उथल-पुथल जारी है, क्योंकि TMC के चार सांसद पहले ही इस्तीफा दे चुके हैं, जो पार्टी की संसदीय स्थिति में अंदरूनी तनाव का संकेत देता है।
