TMC में बढ़ती बगावत: सुष्मिता देव का इस्तीफा और ममता बनर्जी की चुनौतियाँ

पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी टीएमसी में चल रही अंदरूनी कलह ने अब दिल्ली के राजनीतिक माहौल को भी प्रभावित किया है। सुष्मिता देव का राज्यसभा से इस्तीफा और सुखेंदु शेखर रॉय का इस्तीफा ममता बनर्जी की नेतृत्व क्षमता को चुनौती दे रहे हैं। इस संकट के बीच, राजनीतिक विश्लेषक यह अनुमान लगा रहे हैं कि सुष्मिता देव का अगला कदम क्या होगा। क्या वह कांग्रेस में लौटेंगी या नए विकल्प की तलाश करेंगी? जानें इस राजनीतिक उथल-पुथल के बारे में।
 | 
TMC में बढ़ती बगावत: सुष्मिता देव का इस्तीफा और ममता बनर्जी की चुनौतियाँ gyanhigyan

TMC में अंदरूनी कलह का असर

पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (TMC) में चल रही अंदरूनी कलह अब दिल्ली के राजनीतिक माहौल में भी गूंजने लगी है। पार्टी प्रमुख और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पकड़ कमजोर होती नजर आ रही है। विधानसभा में बागी नेता रिताब्रता बनर्जी के समर्थन में 61 विधायकों के एकजुट होने के बाद, अब यह असंतोष राज्यसभा में भी देखने को मिल रहा है।


सुष्मिता देव का इस्तीफा

टीएमसी के वरिष्ठ नेता सुखेंदु शेखर रॉय के राज्यसभा से इस्तीफे के एक हफ्ते बाद, पार्टी की प्रमुख नेता सुष्मिता देव ने भी उच्च सदन की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। इन इस्तीफों ने ममता बनर्जी के खेमे में हड़कंप मचा दिया है।


सुष्मिता देव का राजनीतिक सफर

सुष्मिता देव उत्तर-पूर्व भारत की राजनीति में एक प्रमुख चेहरा मानी जाती हैं। उन्होंने पहले कांग्रेस पार्टी में वरिष्ठ नेता के रूप में काम किया और असम की सिलचर लोकसभा सीट का प्रतिनिधित्व किया। 2019 के लोकसभा चुनाव में हार के बाद, उन्होंने कांग्रेस से मतभेदों के चलते 2021 में टीएमसी में शामिल होने का निर्णय लिया।


टीएमसी में संकट की स्थिति

सुष्मिता देव का इस्तीफा ऐसे समय में आया है जब टीएमसी अपने सबसे गंभीर आंतरिक संकट का सामना कर रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह इस्तीफा ममता बनर्जी की नेतृत्व क्षमता को चुनौती देने वाला है। पिछले हफ्ते सुखेंदु शेखर रॉय का इस्तीफा और अब सुष्मिता देव का कदम यह दर्शाता है कि टीएमसी का संसदीय दल बिखर रहा है।


भविष्य की अटकलें

सुष्मिता देव के इस्तीफे के बाद उनके अगले राजनीतिक कदम को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। चर्चा है कि क्या वह कांग्रेस में वापस जाएंगी या किसी नए विकल्प की तलाश करेंगी। इस बगावत ने टीएमसी को आगामी संसद सत्र से पहले बैकफुट पर ला खड़ा किया है।