TIPRA Motha के प्रमुख ने राजनीति से हटने के संकेत दिए
प्रद्युत किशोर देवबरमा का बयान
फाइल छवि: TIPRA Motha के प्रमुख प्रद्युत बिक्रम माणिक्य देवबरमा (फोटो: @PradyotManikya/X)
अगरतला, 20 सितंबर: TIPRA Motha के संस्थापक प्रद्युत किशोर देवबरमा ने संकेत दिया है कि वे सक्रिय राजनीतिक भूमिकाओं से हट सकते हैं। उनका कहना है कि वे त्रिपुरा के लोगों से सीधे जुड़े रहना चाहते हैं और उनके मुद्दों पर अधिक स्वतंत्रता से बात करना चाहते हैं।
सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक वीडियो संदेश में देवबरमा ने कहा कि औपचारिक पार्टी पद धारण करने से कभी-कभी संगठनात्मक और सार्वजनिक हितों के बीच संतुलन बनाना कठिन हो जाता है। उन्होंने कहा, “मैं त्रिपुरा में रहूंगा और लोगों के साथ खड़ा रहूंगा।”
उन्होंने बताया कि TIPRA Motha का एक पूर्ण सत्र अगले महीने गांव समिति चुनावों के बाद आयोजित किया जाएगा, जिसमें पार्टी की भविष्य की दिशा और उनकी राजनीतिक भूमिका पर चर्चा की जाएगी।
यह टिप्पणी तब आई है जब टिपरसा समझौते के कार्यान्वयन पर चर्चा चल रही है, जो भाजपा और केंद्र के साथ उनकी बातचीत में एक महत्वपूर्ण मुद्दा रहा है।
देवबरमा ने TIPRA Motha के भीतर हो रही घटनाओं पर भी निराशा व्यक्त की। त्रिपुरा जनजातीय क्षेत्र स्वायत्त जिला परिषद (TTAADC) में भ्रष्टाचार और प्रशासनिक अनियमितताओं के आरोपों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि बदलाव लाने के उनके प्रयासों ने अपेक्षित परिणाम नहीं दिए। उन्होंने कहा कि इन घटनाओं ने उनकी पार्टी की छवि को भी प्रभावित किया है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि औपचारिक राजनीतिक पद छोड़ने का मतलब सार्वजनिक जीवन से हटना नहीं है। बल्कि, उनके काम करने का तरीका बदलेगा, जबकि त्रिपुरा के लोगों के हितों की रक्षा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता अपरिवर्तित रहेगी।
