RBI की जून बैठक में कर्जदारों को राहत, लेकिन EMI में बढ़ोतरी का खतरा

जून में होने वाली भारतीय रिजर्व बैंक की बैठक में कर्जदारों को राहत मिलने की संभावना है, लेकिन महंगाई और कच्चे तेल की कीमतों के कारण ईएमआई में बढ़ोतरी का खतरा बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि महंगाई पर दबाव बना रहा, तो आरबीआई अक्टूबर के बाद ब्याज दरों में वृद्धि कर सकता है। जानें इस विषय पर और क्या कहते हैं अर्थशास्त्री और क्या हो सकता है आगे।
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RBI की जून बैठक में कर्जदारों को राहत, लेकिन EMI में बढ़ोतरी का खतरा gyanhigyan

RBI की मॉनेटरी पॉलिसी बैठक में संभावित राहत

जून में होने वाली भारतीय रिजर्व बैंक की मॉनेटरी पॉलिसी बैठक में आम कर्जदारों को राहत मिल सकती है, क्योंकि अधिकांश अर्थशास्त्री ब्याज दरों में तात्कालिक वृद्धि की संभावना नहीं देख रहे हैं। हालांकि, महंगाई, महंगे कच्चे तेल और कमजोर रुपये के कारण वर्ष के अंत तक ईएमआई महंगी होने का खतरा बढ़ गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि महंगाई पर दबाव बना रहा, तो आरबीआई अक्टूबर के बाद ब्याज दरों में 25 से 50 बेसिस पॉइंट की वृद्धि कर सकता है.


बढ़ती महंगाई का खतरा

एक रिपोर्ट के अनुसार, विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि आने वाले महीनों में स्थिति बदल सकती है। यदि कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं और खाद्य वस्तुओं की महंगाई बढ़ती है, तो आरबीआई को ब्याज दरें बढ़ाने का निर्णय लेना पड़ सकता है। इससे आम लोगों की ईएमआई महंगी हो सकती है.


अक्टूबर में संभावित ब्याज दरों में वृद्धि

Moneycontrol के सर्वे में शामिल अधिकांश अर्थशास्त्री मानते हैं कि अक्टूबर की पॉलिसी बैठक में या उसके बाद वित्त वर्ष 2027 में आरबीआई ब्याज दरों में 25 से 50 बेसिस पॉइंट की वृद्धि कर सकता है। सर्वे के अनुसार, FY27 के अंत तक आरबीआई की पॉलिसी दर 5.75 प्रतिशत तक पहुंच सकती है, जो वर्तमान में 5.25 प्रतिशत है। विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिम एशिया में चल रहे जियोपॉलिटिकल तनाव, महंगा कच्चा तेल, कमजोर रुपया और मौसम से संबंधित चुनौतियां महंगाई को बढ़ाने में योगदान दे रहे हैं.


आम लोगों पर असर

इसका प्रभाव आम लोगों की जेब पर भी स्पष्ट हो रहा है। हाल ही में सरकार ने पेट्रोल और डीजल के दाम 4 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ा दिए हैं। इसके अलावा, दूध और सोने की कीमतों में भी वृद्धि देखी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन सभी कारणों से आने वाले महीनों में खुदरा महंगाई और बढ़ सकती है.


विशेषज्ञों की राय

Kotak Mahindra Bank की अर्थशास्त्री उपासना भारद्वाज के अनुसार, बढ़ती ऊर्जा लागत, ऊंचे इनपुट खर्च और कमजोर रुपये के कारण महंगाई का खतरा बना हुआ है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि देश की आर्थिक गतिविधियां अभी मजबूत हैं। वहीं, ICRA की अदिति नायर ने पश्चिम एशिया के तनाव को देखते हुए वित्त वर्ष 2027 के लिए कच्चे तेल का अनुमान 85 डॉलर से बढ़ाकर 95 डॉलर प्रति बैरल कर दिया है.


आगे की संभावनाएं

Barclays की आस्था गुडवानी का कहना है कि पश्चिम एशिया का तनाव भारत की आर्थिक वृद्धि को धीमा कर सकता है। इसके साथ ही, ऊर्जा और खाद्य महंगाई बढ़ने का जोखिम भी बना हुआ है। फिर भी, उन्हें उम्मीद है कि आरबीआई जून में ब्याज दरें स्थिर रखेगा। हालांकि, कुछ अर्थशास्त्रियों का मानना है कि जब तक महंगाई आरबीआई की 6 प्रतिशत की ऊपरी सीमा को पार नहीं करती, तब तक केंद्रीय बैंक सख्ती से बच सकता है. कुल मिलाकर, जून की बैठक में राहत मिलने की उम्मीद है, लेकिन आने वाले महीनों में ईएमआई बढ़ने का खतरा पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है.


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