संसद में हंगामे के बीच अमित शाह के इस्तीफे की मांग

शुक्रवार को संसद में विपक्षी सदस्यों ने प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस की कार्रवाई के खिलाफ हंगामा किया, जिसके चलते कार्यवाही स्थगित कर दी गई। गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग के बीच लोकसभा ने जन्म और मृत्यु के पंजीकरण से संबंधित विधेयक को बिना चर्चा के पारित किया। राज्यसभा में भी इसी तरह का हंगामा देखने को मिला, जिससे सदन की कार्यवाही प्रभावित हुई। जानें इस घटनाक्रम के सभी महत्वपूर्ण पहलुओं के बारे में।
 | 
gyanhigyan

संसद में विपक्ष का हंगामा

शुक्रवार को संसद में विपक्षी सदस्यों ने प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस की कार्रवाई के खिलाफ गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग करते हुए हंगामा किया, जिसके चलते दोनों सदनों की कार्यवाही को पूरे दिन के लिए स्थगित कर दिया गया। इसी हंगामे के बीच लोकसभा ने जन्म और मृत्यु के पंजीकरण से संबंधित कानून में संशोधन का विधेयक बिना चर्चा के पारित कर दिया। जैसे ही निचले सदन की बैठक शुरू हुई, विपक्षी सदस्यों ने छात्रों पर पुलिस की कार्रवाई को लेकर हंगामा शुरू कर दिया।


विपक्षी सदस्य आसन के निकट पहुंचकर गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग करने लगे। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदस्यों से अपने स्थान पर लौटने और प्रश्नकाल चलने देने की अपील की। उन्होंने कहा, 'मैंने कई बार कहा है कि प्रश्नकाल महत्वपूर्ण है, यह सदस्यों का समय है।'


बिरला ने कहा, 'आप प्रश्नकाल के दौरान व्यवधान मत डालिए। सदन को चलने दें। आज प्रियंका गांधी जी का भी प्रश्न है, लेकिन आप लोग कार्यवाही में बाधा डाल रहे हैं।' उन्होंने चेतावनी दी कि कुछ सदस्य भेष बदलकर आते हैं और संसद की पवित्रता को समाप्त कर रहे हैं।


सदन में निर्दलीय सदस्य राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव को साधुओं की तरह भगवा वस्त्र पहने हुए देखा गया। जब शोर-शराबा नहीं थमा, तो अध्यक्ष ने कार्यवाही को दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दिया। बैठक फिर से शुरू होने पर हंगामा जारी रहा।


हंगामे के बीच जन्म और मृत्यु का पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 को बिना चर्चा के पारित कर दिया गया। इसके बाद बैठक को पूरे दिन के लिए स्थगित कर दिया गया। संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई को शुरू हुआ था, और तब से सदन में विभिन्न मुद्दों पर हंगामे के कारण प्रश्नकाल और शून्यकाल नहीं हो सके हैं।


वहीं, राज्यसभा में भी इसी तरह का दृश्य देखने को मिला। नीट प्रश्नपत्र लीक के विरोध में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के मुद्दे पर गृह मंत्री के बयान की मांग को लेकर विपक्षी सदस्यों ने हंगामा किया, जिससे राज्यसभा की बैठक शुरू होने के लगभग बीस मिनट बाद ही स्थगित कर दी गई।


हंगामे के कारण उच्च सदन में शून्यकाल केवल 15 मिनट तक चल सका, जिसमें चार सदस्य ही अपने मुद्दे उठा सके। कार्यवाही शुरू होने पर सभापति सी पी राधाकृष्णन ने आवश्यक दस्तावेज सदन में पेश किए। इसके बाद विपक्षी सदस्यों ने फिर से हंगामा शुरू कर दिया।


विपक्षी सदस्यों ने मांग की कि नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को अपनी बात रखने का अवसर दिया जाए। सभापति से अनुमति मिलने के बाद खरगे ने कहा कि उन्होंने नोटिस दिया है। राधाकृष्णन ने पूछा कि नोटिस किस नियम के तहत दिया गया।


खरगे ने बताया कि उन्होंने नियम 267 के तहत नियत कार्य को स्थगित कर एक विशेष मुद्दे पर चर्चा के लिए नोटिस दिया है। सभापति ने स्पष्ट किया कि नियम 267 के तहत कोई भी नोटिस स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि वह पहले ही इस नियम के बारे में व्यवस्था दे चुके हैं।


खरगे का नोटिस अयोध्या में राम मंदिर के लिए भूमि अधिग्रहण में कथित अनियमितताओं से संबंधित था। इसके बाद विपक्षी सांसदों ने पेपर लीक मामले को लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और गृह मंत्री अमित शाह के सदन में आने की मांग की। विपक्ष ने इस मुद्दे पर गृह मंत्री के इस्तीफे की भी मांग की।


विपक्षी सदस्यों की नारेबाजी के बीच केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उन पर 'सड़क-छाप राजनीति' करने और 'सदन की गरिमा से खिलवाड़' करने का आरोप लगाया। चौहान ने कहा, 'वे केवल हंगामा करना चाहते हैं, चर्चा नहीं।' उन्होंने सदस्यों से शांत रहने और कार्यवाही चलने देने की अपील की, लेकिन जब उनकी बात का असर नहीं हुआ, तो उन्होंने कार्यवाही को दिनभर के लिए स्थगित कर दिया।