शिवसेना में अंदरूनी संघर्ष: उद्धव ठाकरे की ताकत पर संकट
महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के भीतर चल रहे गंभीर आंतरिक विवादों के बीच, आज (बृहस्पतिवार) नई दिल्ली में पार्टी के संसदीय दल की एक महत्वपूर्ण बैठक होने जा रही है। यह बैठक संसद परिसर में स्थित पार्टी कार्यालय में सुबह 11 बजे शुरू होगी। इस बैठक का उद्देश्य यह तय करना है कि उद्धव ठाकरे अपनी संसदीय ताकत को बनाए रख पाएंगे या उन्हें एक और बड़े विभाजन का सामना करना पड़ेगा। पार्टी नेतृत्व ने बुधवार को सभी सांसदों के लिए एक सख्त व्हिप जारी किया, जिसमें उन्हें इस बैठक में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने का निर्देश दिया गया।
इस बैठक को महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा करने के साथ-साथ बागी सांसदों के खिलाफ अयोग्यता की कार्यवाही की तैयारी के लिए बुलाया गया है। यह कदम तब उठाया गया जब यह अटकलें तेज हो गईं कि शिवसेना (उबाठा) के कुछ बागी सांसद लोकसभा में अलग गुट बनाने की योजना बना रहे हैं और बाद में एकनाथ शिंदे की अगुआई वाली शिवसेना में विलय करने का विचार कर रहे हैं।
सांसदों की स्थिति
उद्धव ठाकरे की अगुआई वाली शिवसेना (उबाठा) ने बुधवार को व्हिप जारी कर अपने सांसदों को महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा के लिए बुलाया। इस बैठक में लोकसभा में शिवसेना (यूबीटी) के नौ सदस्य हैं, और अलग गुट बनाने के लिए कम से कम दो-तिहाई सांसदों की आवश्यकता होगी।
अनिल देसाई, राजाभाऊ वाजे और अरविंद सावंत उद्धव खेमे के साथ हैं, जबकि बाकी छह सांसद संजय पाटिल, संजय देशमुख, ओमप्रकाश राजे निंबालकर, भाऊसाहेब वाकचौरे, नागेश पाटिल-आष्टीकर और संजय जाधव अलग खेमे में हैं। यदि बागी गुट का कोई सांसद इस बैठक में शामिल होता है, तो उस गुट को अलग दल की मान्यता नहीं मिल सकेगी।
बागी नेताओं की गतिविधियाँ
सांसद अरविंद सावंत ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से अपील की है कि पार्टी का प्रतिनिधित्व करने का दावा करने वाले किसी भी बागी गुट को मान्यता न दी जाए। सूत्रों के अनुसार, बागी नेताओं के एक गुट ने बुधवार को अनौपचारिक रूप से लोकसभा अध्यक्ष बिरला से मुलाकात की और पार्टी के नौ में से छह सांसदों का समर्थन होने का दावा किया।
दिल्ली में होने वाली यह बैठक, कानूनी और राजनीतिक दृष्टियों से यह तय करेगी कि उद्धव ठाकरे अपनी संसदीय ताकत बनाए रख पाएंगे या उन्हें पार्टी में एक और बड़े विभाजन का सामना करना पड़ेगा। यदि ऐसा होता है, तो यह 2006 में राज ठाकरे के शिवसेना से अलग होने के बाद पार्टी में तीसरा बड़ा विभाजन होगा।
