लोकसभा में भाजपा सांसद की विवादास्पद टिप्पणी पर विपक्ष का हंगामा
विपक्षी सदस्यों का हंगामा
बुधवार को लोकसभा में भाजपा सांसद निशिकांत दुबे द्वारा दिए गए एक विवादास्पद भाषण पर विपक्षी सदस्यों ने तीव्र विरोध किया। दुबे ने कुछ पुस्तकों का उल्लेख करते हुए पूर्व प्रधानमंत्रियों जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी पर टिप्पणी की, जिससे कांग्रेस पार्टी में नाराजगी फैल गई। इसके बाद, कांग्रेस सांसद स्पीकर ओम बिरला के कार्यालय में जाकर दुबे के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई, जिसके परिणामस्वरूप संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू सहित भाजपा सांसदों के साथ उनकी बहस हुई। दुबे भी इस बहस में शामिल थे।
कांग्रेस की शिकायत
कांग्रेस ने अपनी शिकायत में यह सवाल उठाया कि दुबे को एक किताब से उद्धरण देने की अनुमति क्यों दी गई, जबकि राहुल गांधी को ऐसा करने से रोका गया। उन्होंने यह भी पूछा कि दुबे ने नेहरू और इंदिरा गांधी के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियां क्यों कीं। यह शिकायत इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि राहुल गांधी को पूर्व सेना प्रमुख एमएम नरवणे के संस्मरण पर आधारित गलवान घाटी संघर्ष की पुस्तक का हवाला देने की अनुमति नहीं दी गई थी। सरकार ने तर्क दिया कि राहुल गांधी जिस पुस्तक का उल्लेख करना चाहते थे, वह अप्रकाशित है, और स्पीकर ने भी इस मामले में विपक्ष के नेता के खिलाफ निर्णय लिया।
लोकसभा में बार-बार स्थगन
राहुल गांधी को भारत-चीन संघर्ष पर बोलने की अनुमति न मिलने के बाद से सोमवार से लोकसभा में बार-बार स्थगन हो रहा है। कई विपक्षी सांसदों ने कांग्रेस नेता के समर्थन में बोलने से इनकार कर दिया है। विपक्षी सांसदों ने चेतावनी दी है कि यदि राहुल गांधी को बोलने नहीं दिया गया, तो वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी लोकसभा में बोलने नहीं देंगे। इस बीच, स्पीकर ओम बिरला ने विपक्ष से संसदीय नियमों का पालन करने और विरोध करते समय सदन की गरिमा को बनाए रखने का आग्रह किया।
स्पीकर का संदेश
उन्होंने कहा कि यदि आप नियमों का उल्लंघन करते हैं, तो जनता का लोकतंत्र पर विश्वास डगमगा सकता है। सभी वरिष्ठ नेता हैं, लेकिन सदन के नियमों का पालन करना आवश्यक है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि विरोध केवल नारे लगाने या पोस्टर लहराने से नहीं होता, बल्कि यह शब्दों और तर्कों के माध्यम से किया जाना चाहिए।
