राघव चड्ढा की पार्टी में गिरती स्थिति: आम आदमी पार्टी ने लिया बड़ा कदम
राघव चड्ढा की नई चुनौतियाँ
राजनीति में युवा नेता के रूप में उभरने वाले राघव चड्ढा अब अपनी ही पार्टी के निशाने पर हैं। आम आदमी पार्टी ने उन्हें राज्यसभा में उप नेता के पद से हटा दिया है, साथ ही उनकी संसद में बोलने की क्षमता पर भी अंकुश लगा दिया है। 37 वर्षीय चड्ढा को कभी अरविंद केजरीवाल का करीबी सहयोगी माना जाता था, लेकिन अब वे पार्टी में अलग-थलग पड़ गए हैं।
शुक्रवार को पार्टी की वरिष्ठ नेता आतिशी और सौरभ भारद्वाज ने चड्ढा पर तीखे आरोप लगाए। उनके अनुसार, हाल ही में विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पेश किया था, जिसमें उन पर भाजपा के प्रति पक्षपाती होने का आरोप लगाया गया था।
आतिशी ने कहा कि जब पूरा विपक्ष लोकतंत्र की रक्षा के लिए एकजुट था, तब चड्ढा ने इस प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करने से मना कर दिया। उन्होंने सवाल उठाया, “आप भाजपा और पीएम मोदी से इतना क्यों डर रहे हैं? जब संसद में एलपीजी गैस की कमी पर चर्चा हो रही थी, तब आप चुप क्यों थे?”
सिर्फ समोसा नहीं, गंभीर मुद्दे भी हैं
पार्टी के नेताओं ने चड्ढा के उन मुद्दों पर भी कटाक्ष किया जिन्हें वे संसद में उठाते रहे हैं। सौरभ भारद्वाज ने कहा कि जब देश गंभीर समस्याओं का सामना कर रहा है, तब चड्ढा हवाई अड्डों पर समोसे की कीमत और फलों के जूस के डिब्बे जैसे सतही मुद्दों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। चड्ढा ने हाल ही में इन पर बने मीम्स का स्वागत किया था, लेकिन पार्टी इसे उनकी गंभीरता की कमी मानती है।
लंदन यात्रा और पंजाब का ‘सुपर CM’
पार्टी में चड्ढा के खिलाफ नाराजगी की जड़ें गहरी हैं। 2024 में जब अरविंद केजरीवाल को कथित आबकारी घोटाले में गिरफ्तार किया गया, तब चड्ढा अपनी आंखों के ऑपरेशन के लिए लंदन में थे। आतिशी ने इस पर सवाल उठाते हुए कहा, “हम सड़कों पर संघर्ष कर रहे थे और आप लंदन में थे। क्या आप जेल जाने से डर रहे थे?”
पंजाब में चड्ढा की स्थिति
2022 में पंजाब में बड़ी जीत के बाद चड्ढा को ‘सुपर मुख्यमंत्री’ कहा जाने लगा था, जिससे स्थानीय नेताओं में असंतोष बढ़ा। 2025 में दिल्ली विधानसभा चुनाव हारने के बाद केजरीवाल और सिसोदिया ने पंजाब पर अपना नियंत्रण मजबूत किया, जिससे चड्ढा की भूमिका कम होती गई।
मार्च 2026 में जब कोर्ट ने केजरीवाल और सिसोदिया को आबकारी मामले में बरी किया, तब भी चड्ढा की चुप्पी ने स्थिति को और बिगाड़ दिया।
चुप रहने का अपना तर्क
पद से हटाए जाने के बाद चड्ढा ने एक वीडियो जारी कर अपनी चुप्पी तोड़ी है। उन्होंने कहा, “क्या संसद में जनता के मुद्दे उठाना अपराध है? मेरी चुप्पी को मेरी हार न समझें।” उन्होंने यह भी संकेत दिया कि उन्हें पार्टी द्वारा बोलने से रोका जा रहा है। उनकी जगह अब पंजाब के उद्योगपति अशोक मित्तल को राज्यसभा में उप-नेता बनाया गया है।
क्या चड्ढा भाजपा में शामिल होंगे?
राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि क्या चड्ढा भाजपा का दामन थाम सकते हैं। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने उन्हें कॉम्प्रोमाइज्ड तक कह दिया है। वहीं, दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने कहा कि यह चड्ढा को तय करना है कि उनका भविष्य क्या होगा। केजरीवाल पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि वे लोगों का इस्तेमाल कर उन्हें फेंक देते हैं।
